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चार अधिकारियों को IAS में प्रोबेशन पर शामिल किया गया, कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल

चार अधिकारियों को IAS में प्रोबेशन पर शामिल किया गया, कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल
 
चार अधिकारियों को IAS में प्रोबेशन पर शामिल किया गया, कांग्रेस अध्यक्ष ने उठाए सवाल

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार 8 अगस्त को अन्य सेवाओं से चयनित चार अधिकारियों को प्रोबेशन पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल किया गया है। इस नई सूची में डॉ. नीतीश शर्मा, अमिता शर्मा, नरेंद्र कुमार मंघानी और नरेश कुमार गोयल के नाम शामिल हैं। सभी अधिकारी सामान्य वर्ग से चयनित हुए हैं।

प्रशासन ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक और नियमों के तहत की गई है। चारों अधिकारियों को उनके अनुभव और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर IAS में प्रोबेशन पर शामिल किया गया है। यह कदम राज्य प्रशासनिक ढांचे को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हालांकि, इस चयन प्रक्रिया पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सवाल उठाए हैं। डोटासरा ने कहा कि यह चयन पारदर्शिता और निष्पक्षता के मानकों पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि इस प्रक्रिया की जांच की जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई हो, तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि IAS में शामिल होने वाले अधिकारियों की नियुक्ति सिर्फ योग्यता और अनुभव पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सामान्य वर्ग के चयन में किसी प्रकार की पक्षपातपूर्ण गतिविधि हुई है, तो इसे गंभीरता से देखा जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि IAS में प्रोबेशन पर शामिल होने वाले अधिकारी राज्य के प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं द्वारा चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है और यह सुनिश्चित करता है कि प्रशासनिक निर्णयों में किसी भी तरह की अनियमितता न हो।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने कहा है कि चयन प्रक्रिया के सभी चरण नियमों और मानकों के अनुरूप किए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि चारों अधिकारी उनके अनुभव, दक्षता और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर चयनित किए गए हैं। इसके साथ ही विभाग ने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज़ और प्रक्रियाएं पूरी तरह से वैधानिक तरीके से पूरी की गई हैं।

इस विवाद के बीच, प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि चारों अधिकारी अपने कार्यकाल के दौरान राज्य के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात नहीं हुआ है और यह पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया गया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। यह देखना बाकी है कि सरकार और संबंधित विभाग इस विवाद को कैसे संभालते हैं और क्या आगे इस चयन प्रक्रिया की समीक्षा की जाती है।