आमेर मावठा में कार शूटिंग के लिए 50 हजार की रिश्वत, फुटेज में देंखे वनपाल और वनरक्षक न्यायिक हिरासत में
जयपुर के आमेर मावठा में कार की वीडियो शूटिंग के मामले में रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार वनपाल और वनरक्षक को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जांच में सामने आया कि वन विभाग से शूटिंग की अनुमति लेने और निर्धारित फीस जमा कराने के बावजूद कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई थी। आरोप है कि वनपाल ने सिक्योरिटी राशि वापस दिलवाने के साथ ही शूटिंग की अनुमति से जुड़े मामले में भी पैसे मांगे थे।इस मामले में वनपाल श्याम सिंह शेखावत और वनरक्षक शिवकिशोर को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा गया था। अब एसीबी की ओर से किए गए सत्यापन के दौरान रिकॉर्ड की गई बातचीत भी सामने आई है। इस बातचीत में वनपाल कथित तौर पर फोटोग्राफर से पहले दिए गए 15 हजार रुपये का जिक्र करते हुए और रकम देने की बात कह रहा है।
अनुमति और फीस जमा कराने के बाद भी रिश्वत का आरोप
जानकारी के अनुसार, 28 और 29 सितंबर को आमेर के मावठा में एक फोटोग्राफर ने कार की वीडियो शूटिंग की थी। इसके लिए वन विभाग से अनुमति ली गई थी और निर्धारित फीस भी जमा करवाई गई थी। इसके बावजूद वनपाल श्याम सिंह शेखावत और वनरक्षक शिवकिशोर पर 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा।एसीबी की कार्रवाई के बाद मामले की जांच में यह पहलू भी सामने आया कि शूटिंग से संबंधित अनुमति और सिक्योरिटी राशि की वापसी को लेकर कथित रूप से पैसों की मांग की गई थी। जांच एजेंसी इस मामले में उपलब्ध रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
सत्यापन रिकॉर्ड में बातचीत सामने आई
एसीबी के सत्यापन रिकॉर्ड में वनपाल और शिकायतकर्ता के बीच हुई कथित बातचीत का भी उल्लेख है। इसमें वनपाल कहते हुए सुनाई देता है, ‘15 हजार दिए थे ना आपने।’ इसके बाद कथित तौर पर 15 हजार रुपये और देने की बात कही गई। बातचीत में चार दिन में 40 हजार रुपये देने और दोपहर दो बजे के बाद आने का भी जिक्र बताया गया है।यह बातचीत रिश्वत मांगने के आरोपों की जांच में अहम साक्ष्य मानी जा सकती है। हालांकि, रिकॉर्ड में दर्ज बातचीत और उससे जुड़े तथ्यों का अंतिम मूल्यांकन जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा।
एसीबी की कार्रवाई के बाद जांच जारी
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों वनकर्मियों को गिरफ्तार किया था। अब उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रिश्वत की मांग किन परिस्थितियों में की गई और सिक्योरिटी राशि की वापसी तथा शूटिंग की अनुमति से इसका क्या संबंध था।मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब फोटोग्राफर ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति लेकर फीस जमा कर दी थी, तो फिर कथित रूप से अतिरिक्त रकम क्यों मांगी गई। फिलहाल दोनों वनकर्मियों के खिलाफ लगे आरोपों पर आगे की कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के अनुसार होगी।
