पत्नी के ATM से जबरन पैसे निकालना और अवैध संबंधों के झूठे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता: राजस्थान हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी
राजस्थान हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि पत्नी के साथ आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना करना मानसिक क्रूरता के दायरे में आ सकता है। कोर्ट ने पत्नी के सैलरी अकाउंट के एटीएम कार्ड से जबरन पैसे निकालने, उसके सहकर्मियों के साथ अवैध संबंध होने के झूठे आरोप लगाने और सूचना का अधिकार (RTI) कानून के जरिए उसकी निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश को मानसिक क्रूरता माना है।
मामले में पति पर आरोप था कि वह पत्नी के बैंक खाते पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता था। इसके लिए वह पत्नी के सैलरी अकाउंट से जुड़े एटीएम कार्ड का इस्तेमाल कर जबरन पैसे निकालता था। पत्नी की कमाई पर इस तरह अधिकार जताने और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता में दखल देने को वैवाहिक जीवन में प्रताड़ना के रूप में देखा गया।
सहकर्मियों के साथ अवैध संबंधों के लगाए आरोप
मामले में पति पर पत्नी के चरित्र को लेकर भी गंभीर आरोप लगाने की बात सामने आई। आरोप था कि वह पत्नी के कार्यालय में काम करने वाले सहकर्मियों के साथ उसके अवैध संबंध होने की बातें कहता था। इस तरह के आरोपों से पत्नी की सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत सम्मान प्रभावित हुआ।
कोर्ट ने माना कि बिना किसी ठोस आधार के पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाना और उसके सहकर्मियों के साथ अनुचित संबंध होने के आरोप लगाना मानसिक उत्पीड़न का रूप ले सकता है। वैवाहिक रिश्ते में एक-दूसरे के सम्मान और भरोसे का महत्व होता है। ऐसे में लगातार चरित्र पर संदेह करना रिश्ते को प्रभावित करने वाला व्यवहार है।
RTI के जरिए निजी जानकारी मांगने पर भी सवाल
इस मामले में पति की ओर से सूचना का अधिकार (RTI) कानून का इस्तेमाल कर पत्नी की निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश भी विवाद का विषय बनी। कोर्ट ने इस व्यवहार को भी मानसिक क्रूरता के आकलन में महत्वपूर्ण माना।
RTI कानून का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति को परेशान करने या उसकी निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
वैवाहिक संबंधों में सम्मान और निजता जरूरी
राजस्थान हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से स्पष्ट होता है कि वैवाहिक रिश्ते में आर्थिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत सम्मान और निजता का महत्व है। पति-पत्नी के बीच मतभेद होना अलग बात है, लेकिन किसी की कमाई पर जबरन अधिकार जताना, चरित्र पर झूठे आरोप लगाना और निजी जानकारी हासिल करने के लिए दबाव बनाना मानसिक प्रताड़ना के रूप में देखा जा सकता है।
हालांकि, इस मामले के अंतिम आदेश, पक्षकारों के नाम और केस नंबर की जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए कोर्ट के आदेश के सटीक कानूनी निष्कर्ष और अन्य निर्देशों की पुष्टि मूल फैसले से की जानी चाहिए।
