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झुंझुनूं में गांव का नाम बदलने के विरोध में पैदल मार्च, वीडियो में देंखे प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा बेहोश

झुंझुनूं में गांव का नाम बदलने के विरोध में पैदल मार्च, वीडियो में देंखे प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा बेहोश
 
झुंझुनूं में गांव का नाम बदलने के विरोध में पैदल मार्च, वीडियो में देंखे प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा बेहोश

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में गांव का नाम बदलने के विरोध को लेकर सोमवार को बड़ा प्रदर्शन किया गया। इस आंदोलन में पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ग्रामीणों के साथ 22 किलोमीटर लंबी पैदल रैली में शामिल हुए। कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन के दौरान भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच उनकी तबीयत बिगड़ गई और वह अचानक बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन के समय तापमान करीब 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास था। लंबे पैदल मार्च और तेज गर्मी के कारण राजेंद्र गुढ़ा पसीने से पूरी तरह तरबतर हो गए थे। कलेक्ट्रेट के सामने प्रदर्शन के दौरान अचानक उनकी तबीयत खराब हुई और वह सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद मौके पर मौजूद समर्थकों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।

लोगों ने तत्काल उनकी मदद की। किसी ने तौलिये से हवा की तो किसी ने उन पर पानी छिड़का, ताकि उन्हें राहत मिल सके। हालांकि स्थिति सामान्य होने के बाद भी गुढ़ा ने अस्पताल जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब आंदोलन में शामिल लोग तेज धूप में बैठे हैं तो वह खुद आराम के लिए छांव या अस्पताल नहीं जा सकते।राजेंद्र गुढ़ा ने प्रशासन पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके कारण लोगों को कड़ी धूप में बैठना पड़ा। उन्होंने कहा, “प्रशासन ने हमें टेंट नहीं लगाने दिया। हमारे पास छाया की कोई व्यवस्था नहीं है। मैं ऐसा नहीं कर सकता कि मेरे सारे भाई 45 डिग्री तापमान में धूप में बैठे रहें और मैं छांव में जाकर बैठ जाऊं।”

प्रदर्शन के दौरान पूर्व मंत्री ने गांव का नाम बदलने के प्रस्ताव का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने शेखावाटी क्षेत्र के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की सांस्कृतिक विरासत को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। गुढ़ा ने कहा कि शेखावाटी के इतिहास में राव शेखा के हर युद्ध में मुस्लिम समुदाय के लोग उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे और सूफी संत शेख बुरहान इस क्षेत्र की आस्था और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।उन्होंने आरोप लगाया कि नाम परिवर्तन की यह प्रक्रिया केवल एक गांव तक सीमित नहीं रह सकती। गुढ़ा ने कहा, “आज गांव का नाम बदला जा रहा है, कल शेखावाटी का नाम भी बदलने की कोशिश होगी।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गांव का नाम बदला गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए। आंदोलनकारियों ने प्रशासन से नाम परिवर्तन के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की और कहा कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। फिलहाल मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। प्रदर्शनकारियों ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।