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भरतपुर के मोतीमहल पर झंडा विवाद फिर गहराया, वीडियो में देखें विश्वेंद्र सिंह का ऐलान— 13 फरवरी को खुद लगाऊंगा रियासतकालीन ध्वज

भरतपुर के मोतीमहल पर झंडा विवाद फिर गहराया, वीडियो में देखें विश्वेंद्र सिंह का ऐलान— 13 फरवरी को खुद लगाऊंगा रियासतकालीन ध्वज
 
भरतपुर के मोतीमहल पर झंडा विवाद फिर गहराया, वीडियो में देखें विश्वेंद्र सिंह का ऐलान— 13 फरवरी को खुद लगाऊंगा रियासतकालीन ध्वज

भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में मोतीमहल पर रियासतकालीन झंडा लगाने को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। यह मामला बीते कई वर्षों से चर्चा में बना हुआ है और अब पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह के ताजा बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। गुरुवार को विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर साफ शब्दों में ऐलान किया कि वे 13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती के अवसर पर स्वयं मोतीमहल पर रियासतकालीन झंडा लगाएंगे।

अपने पोस्ट में विश्वेंद्र सिंह ने लिखा, “13 फरवरी को महाराजा सूरजमल की जयंती के दिन मैं खुद झंडा लगाऊंगा। किसी में हिम्मत है तो रोक कर दिखा देना मुझे।” उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। यह बयान ऐसे समय आया है, जब भरतपुर राजपरिवार के भीतर पिछले पांच वर्षों से चला आ रहा पारिवारिक विवाद सुलझने के कगार पर बताया जा रहा था।

विश्वेंद्र सिंह ने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि उनकी पत्नी और बेटे की वजह से यह विवाद एक बार फिर उलझ गया है। उन्होंने कहा कि अब तक मोतीमहल पर भरतपुर का रियासतकालीन झंडा नहीं लगाया गया, जिससे पूरे मामले ने फिर तूल पकड़ लिया। उनका कहना है कि अगर पूर्व में लिए गए फैसलों का पालन किया गया होता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।

गौरतलब है कि इस झंडा विवाद को सुलझाने के लिए पूर्व में कई पंचायतें और बैठकों का आयोजन किया गया था। इन पंचायतों में यह निर्णय लिया गया था कि 21 सितंबर 2025 को मोतीमहल से युद्ध भूमि का झंडा हटाकर उसकी जगह भरतपुर रियासत का ऐतिहासिक झंडा लगाया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार झंडा बदला भी गया था, लेकिन अगले ही दिन 22 सितंबर को एक युवक द्वारा वह झंडा हटा दिया गया। इसके बाद से अब तक मोतीमहल पर कोई भी झंडा नहीं लगाया गया है।

झंडा हटाए जाने की घटना के बाद से ही मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच भी इसे लेकर अलग-अलग मत सामने आए। कुछ लोगों का कहना है कि यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है, जिसे आपसी सहमति और शांति के साथ सुलझाया जाना चाहिए, जबकि कुछ इसे राजपरिवार के आंतरिक विवाद के रूप में देख रहे हैं।

विश्वेंद्र सिंह के ताजा ऐलान के बाद एक बार फिर आशंका जताई जा रही है कि 13 फरवरी को मोतीमहल के आसपास तनाव की स्थिति बन सकती है। महाराजा सूरजमल की जयंती भरतपुर में बड़े पैमाने पर मनाई जाती है और इस दिन बड़ी संख्या में लोग मोतीमहल पहुंचते हैं। ऐसे में झंडा लगाने को लेकर किसी भी प्रकार की टकराव की स्थिति प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन हालात को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। भरतपुर के लोग अब यह देख रहे हैं कि यह विवाद शांतिपूर्ण तरीके से सुलझेगा या फिर आने वाले दिनों में और गहराएगा।