बैक डोर से एंट्री की आशंका: फिजियोथेरेपिस्ट भर्ती पर उठे सवाल, 38 साल पुराने डिप्लोमा के आधार पर निकली वैकेंसी
सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। फिजियोथेरेपिस्ट पदों पर निकली भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों ने योग्यता मानकों पर आपत्ति जताई है। आरोप है कि भर्ती में ऐसी शैक्षणिक योग्यता तय की गई है, जो करीब 38 साल पुराने डिप्लोमा कोर्स के आधार पर तैयार की गई है। इसे लेकर कई अभ्यर्थियों ने बैक डोर से एंट्री की आशंका जताई है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्तमान समय में फिजियोथेरेपी क्षेत्र में शिक्षा और प्रशिक्षण के स्तर में काफी बदलाव आ चुका है। ऐसे में पुरानी योग्यता के आधार पर भर्ती निकालना कई सवाल खड़े करता है।
38 साल पहले पूरा हुआ था डिप्लोमा
जानकारी के अनुसार, जिस डिप्लोमा योग्यता को भर्ती में मान्यता दी गई है, वह कई दशक पुरानी है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह योग्यता मौजूदा समय की जरूरतों और फिजियोथेरेपी क्षेत्र में हुए बदलावों के अनुरूप नहीं है।
उनका कहना है कि आज के समय में फिजियोथेरेपी से जुड़े कोर्स में आधुनिक तकनीक, नई चिकित्सा पद्धतियों और बेहतर प्रशिक्षण को शामिल किया जाता है। ऐसे में केवल पुराने डिप्लोमा को आधार बनाकर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
अभ्यर्थियों ने उठाई पारदर्शिता की मांग
भर्ती में शामिल होने वाले उम्मीदवारों ने मांग की है कि योग्यता मानकों की दोबारा समीक्षा की जाए और प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए। उनका कहना है कि सभी योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिलना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने यह भी सवाल उठाया है कि अगर किसी विशेष व्यक्ति या समूह को फायदा पहुंचाने के लिए योग्यता तय की गई है, तो यह अन्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा।
विभाग से मांगा गया स्पष्टीकरण
इस मामले को लेकर संबंधित विभाग से स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती नियमों और योग्यता को लेकर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
वहीं, भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
भर्ती नियमों पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
सरकारी नौकरियों में योग्यता, परीक्षा प्रक्रिया और चयन प्रणाली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि किसी भी भर्ती में नियम ऐसे होने चाहिए, जिससे सभी उम्मीदवारों को बराबरी का मौका मिले और चयन प्रक्रिया पर भरोसा बना रहे।
फिलहाल फिजियोथेरेपिस्ट भर्ती को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है और अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच तथा स्पष्ट जवाब की मांग कर रहे हैं।
