तलाक के बाद बच्चे के पासपोर्ट पर पिता का नाम जरूरी नहीं, वीडियो में जाने राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चे के पासपोर्ट से जुड़े एक अहम मामले में कहा है कि तलाक के बाद यदि बच्चे की पूरी कस्टडी मां के पास है और पिता ने बच्चे से अपने सभी रिश्ते खत्म कर लिए हैं, तो पासपोर्ट में पिता का नाम दर्ज करना अनिवार्य नहीं है। ऐसी स्थिति में बच्चे के पासपोर्ट पर केवल मां का नाम पर्याप्त हो सकता है।जस्टिस मनीष शर्मा की अदालत ने बच्चे की ओर से उसकी मां द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने पासपोर्ट कार्यालय की ओर से जारी उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें बच्चे का पासपोर्ट रिन्यू कराने के लिए पिता का नाम बताते हुए शपथ-पत्र पेश करने की मांग की गई थी।
मामले में बच्चे की कस्टडी पूरी तरह से उसकी मां के पास थी। याचिका में बताया गया कि तलाक के बाद पिता ने बच्चे से अपने सभी संबंध खत्म कर लिए थे। इसके बावजूद पासपोर्ट के नवीनीकरण के दौरान पिता का नाम और उससे संबंधित शपथ-पत्र की मांग की गई। इसको लेकर मां की ओर से हाईकोर्ट का रुख किया गया।अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए पासपोर्ट अथॉरिटी के 13 मई 2024 के आदेश को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकरण को निर्देश दिया कि बच्चे का पासपोर्ट एक महीने के भीतर रिन्यू करके जारी किया जाए। इसमें पिता का नाम दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी और केवल मां का नाम ही पासपोर्ट पर दर्ज किया जाएगा।
मां की कस्टडी और पिता के संबंध खत्म होने पर फैसला
हाईकोर्ट का यह आदेश उस स्थिति से जुड़ा है, जिसमें बच्चे की कस्टडी पूरी तरह मां के पास है और पिता ने बच्चे से संबंध समाप्त कर लिए हैं। अदालत ने ऐसी परिस्थितियों में पासपोर्ट जारी करने के लिए पिता का नाम अनिवार्य करने की आवश्यकता नहीं मानी।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तलाक के बाद कई बार बच्चों के दस्तावेजों को लेकर माता-पिता के बीच विवाद की स्थिति बन जाती है। पासपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज के नवीनीकरण में माता-पिता से जुड़े विवरण को लेकर अलग-अलग परिस्थितियां सामने आती हैं।कोर्ट के निर्देश के बाद अब संबंधित पासपोर्ट अथॉरिटी को तय समय सीमा के भीतर बच्चे का पासपोर्ट जारी करना होगा। इसमें केवल मां का नाम दर्ज किया जाएगा। अदालत ने इस मामले में पासपोर्ट कार्यालय की उस शर्त को स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत पिता का नाम बताने वाला शपथ-पत्र मांगा गया था।राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर न्यायिक अधिकारियों और अदालत से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
इस फैसले से स्पष्ट है कि बच्चे के पासपोर्ट में माता-पिता की जानकारी को लेकर परिस्थितियों के अनुसार विचार किया जा सकता है। खास तौर पर ऐसे मामलों में जहां बच्चे की पूरी कस्टडी एक अभिभावक के पास हो और दूसरे अभिभावक से संबंध समाप्त हो चुके हों, पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में अदालत के निर्देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
