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हनुमानगढ़ में 8,000 बीघा भूमि को ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ घोषित करने के प्रस्ताव का किसानों ने जोरदार विरोध किया

हनुमानगढ़ में 8,000 बीघा भूमि को ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ घोषित करने के प्रस्ताव का किसानों ने जोरदार विरोध किया
 
हनुमानगढ़ में 8,000 बीघा भूमि को ‘डीम्ड फॉरेस्ट’ घोषित करने के प्रस्ताव का किसानों ने जोरदार विरोध किया

जिले के बड़ोपल‑बारानी क्षेत्र में लगभग 8,000 बीघा कृषि भूमि को वन विभाग द्वारा डीम्ड फॉरेस्ट (Forest Land) घोषित करने के प्रस्ताव का विरोध तेज हो गया है। किसानों का कहना है कि यह जमीन दशकों से कृषि उपयोग में है और कई परिवारों की आजीविका इसी पर निर्भर है, इसलिए इसे वन भूमि में बदलने का निर्णय अन्यायपूर्ण है।

किसानों का गुस्सा और ज्ञापन

मंगलवार को भाजपा के पूर्व विधायक धर्मेंद्र मोची के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान जिला मुख्यालय हनुमानगढ़ पहुंचे और जिला कलेक्टर खुशाल यादव को विरोध का ज्ञापन सौंपा। किसानों ने बताया कि उक्त भूमि पर उनके खातेदारी अधिकार राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हैं और वे पीढ़ियों से वहीं खेती और पशुपालन कर रहे हैं।

किसानों का दावा है कि प्रस्ताव के लागू होने पर करीब 500 किसान अपनी जमीन खो देंगे और उनके परिवारों की आजीविका पर सीधा संकट आएगा। उन्होंने कहा है कि उनकी खेती, पशुपालन और पारिवारिक निवास का यही क्षेत्र है, इसलिए इसे डीम्ड फॉरेस्ट घोषित करना उनका *आर्थिक व सामाजिक अधिकार छीने जाने जैसा है।

अनुचित प्रक्रिया का आरोप

धर्मेंद्र मोची ने आरोप लगाया कि वन विभाग किसानों की सहमति और पर्याप्त सुनवाई के बिना यह प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है, जो कानून और न्याय के खिलाफ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि किसानों की आपत्तियों का निस्तारण होने तक डीम्ड फॉरेस्ट की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए।

आंदोलन की चेतावनी

किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे और उच्च स्तर पर भी अपना मामला उठाएंगे। उन्होंने कहा कि ऐसा कदम उनके अधिकारों और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए वे अपनी जमीन को हथियाने नहीं देंगे।

📌 क्या है डीम्ड फॉरेस्ट (Deemed Forest)?
डीम्ड फॉरेस्ट वह भूमि होती है जिसे कानून के तहत औपचारिक रूप से वन घोषित नहीं किया गया हो, लेकिन शासन या अदालतों द्वारा वन भूमि जैसा संरक्षण प्राप्त माना जाता है। भारत में कई बार राजस्व भूमि, पनícula पट्टे वाली भूमि या अन्य कृषि भूमि को पर्यावरणीय कारणों से वन भूमि मान लिया जाता है—जिस पर विवाद भी अक्सर सामने आते हैं जब किसानों के खेती के अधिकार इससे प्रभावित होते हैं।