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कोटा में किसानों की हुंकार रैली, वीडियो में देखें ट्रैक्टरों के साथ उपखंड कार्यालय पहुंचे, फसल खराबे के मुआवजे की मांग तेज

कोटा में किसानों की हुंकार रैली, वीडियो में देखें ट्रैक्टरों के साथ उपखंड कार्यालय पहुंचे, फसल खराबे के मुआवजे की मांग तेज
 
कोटा में किसानों की हुंकार रैली, वीडियो में देखें ट्रैक्टरों के साथ उपखंड कार्यालय पहुंचे, फसल खराबे के मुआवजे की मांग तेज

राजस्थान के कोटा जिले में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर मंगलवार को जोरदार प्रदर्शन किया। रामगंजमंडी क्षेत्र में भारतीय किसान संघ चित्तौड़ प्रांत के आह्वान पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली निकालकर प्रशासन और सरकार को अपनी ताकत का एहसास कराया। बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों में सवार होकर सड़कों पर उतरे और नारेबाजी करते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचे।

रैली के दौरान किसानों ने ‘मुआवजा दो, किसान बचाओ’ जैसे नारों के साथ सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया। किसानों का कहना है कि हाल ही में फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, लेकिन अब तक मुआवजा राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। ऐसे में उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है।

प्रदर्शन के बाद किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने तहसीलदार नेहा वर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि फसल खराबे का मुआवजा जल्द से जल्द सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा किया जाए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।

भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में कई किसानों की फसल प्राकृतिक आपदा और मौसम की मार से पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। इसके बावजूद राहत राशि में देरी हो रही है, जिससे किसान कर्ज और आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए।

किसान संघ ने प्रशासन को चेतावनी भी दी है। संघ के नेताओं ने साफ कहा कि यदि 12 फरवरी तक किसानों के खातों में मुआवजा राशि जमा नहीं की गई, तो 13 फरवरी से आंदोलन और उग्र किया जाएगा। इसके तहत रामगंजमंडी की धानमंडी बंद कर दी जाएगी और किसान मंडी गेट पर ही धरना देंगे।

नेताओं ने कहा कि किसान वहीं खाना पकाएंगे और खाएंगे तथा अनिश्चितकालीन धरना जारी रखेंगे, जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता। इस चेतावनी के बाद प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा और किसानों ने अनुशासित तरीके से अपनी बात रखी।

किसानों का कहना है कि यह आंदोलन उनकी मजबूरी है, क्योंकि फसल ही उनकी आजीविका का एकमात्र सहारा है। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।