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बाड़मेर में क्रूड तेल उत्पादन के बाद कृषि प्रभावित, किसानों की मेहनत बर्बाद

बाड़मेर में क्रूड तेल उत्पादन के बाद कृषि प्रभावित, किसानों की मेहनत बर्बाद
 
बाड़मेर में क्रूड तेल उत्पादन के बाद कृषि प्रभावित, किसानों की मेहनत बर्बाद

राजस्थान के बाड़मेर जिले में देश के सबसे बड़े क्रूड तेल उत्पादन क्षेत्रों में गंभीर लापरवाही सामने आई है। स्थानीय किसानों ने शिकायत की है कि केयर्न वेदांता कंपनी की गतिविधियों के बाद उनके कृषि ट्यूबवेल से काला और बदबूदार पानी निकल रहा है, जो सीधे तौर पर खेतों और फसलों को नुकसान पहुँचा रहा है।

किसानों का कहना है कि यह पानी सामान्य सिंचाई के लिए उपयुक्त नहीं है। इसकी वजह से खेतों में फसलें सही तरीके से नहीं उग पा रही हैं और जमीन धीरे-धीरे बंजर होने की कगार पर है। कई किसानों ने बताया कि उनकी मेहनत और वर्षों की उपज इस प्रदूषण की वजह से बर्बाद हो रही है। स्थानीय निवासी इसे गंभीर समस्या मानते हुए प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि क्रूड तेल उत्पादन क्षेत्रों में अगर पर्यावरण और कृषि सुरक्षा के मानक पालन नहीं किए गए तो इसका प्रभाव न केवल मिट्टी और जल स्रोतों पर पड़ता है, बल्कि आसपास के ग्रामीण और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर डालता है। मिट्टी और पानी में प्रदूषण लंबे समय तक खेती को प्रभावित कर सकता है और इससे क्षेत्र की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है।

स्थानीय प्रशासन ने बताया कि वे जल्द ही कंपनी के खिलाफ जांच शुरू करेंगे और किसानों को राहत देने के लिए जरूरी कदम उठाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरण और कृषि दोनों को ध्यान में रखते हुए भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कड़ी निगरानी की जाएगी।

कृषि विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का कहना है कि बाड़मेर जैसे तेल उत्पादन क्षेत्र में किसानों की फसलों को सुरक्षित रखना और प्रदूषण नियंत्रण की सख्त व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या व्यापक रूप ले सकती है और पूरे जिले की कृषि प्रभावित हो सकती है।

किसानों ने मांग की है कि कंपनी से हुए नुकसान की भरपाई की जाए और उनके खेतों की मिट्टी और जल स्रोत को प्रदूषण मुक्त किया जाए। वहीं, कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के अनुसार पर्यावरण सुरक्षा उपाय अपनाए हैं और मामले की जांच की जा रही है।

स्थानीय लोग और किसान अब इस मुद्दे को मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उजागर कर रहे हैं ताकि सरकार और संबंधित एजेंसियां त्वरित कार्रवाई करें। उनका कहना है कि अगर जल्दी कदम नहीं उठाए गए तो केवल आर्थिक नुकसान ही नहीं होगा, बल्कि पूरे इलाके की कृषि संस्कृति और जीवन पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

इस घटना ने बाड़मेर जिले में तेल उत्पादन और कृषि के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया है। विशेषज्ञ और किसान दोनों इस बात पर जोर दे रहे हैं कि तेल कंपनियों को पर्यावरणीय नियमों का पालन करना अनिवार्य है, ताकि ग्रामीण और कृषि क्षेत्र सुरक्षित रहें।

इस प्रकार, बाड़मेर में किसानों के ट्यूबवेल से निकल रहे काले और बदबूदार पानी की समस्या ने न केवल कृषि को खतरे में डाल दिया है, बल्कि यह प्रदूषण नियंत्रण और कंपनी की जिम्मेदारी की दिशा में गंभीर सवाल भी उठाता है। प्रशासन और कंपनी दोनों पर दबाव है कि वे जल्द से जल्द समाधान निकालें और किसानों की जमीन और जीवन को सुरक्षित बनाएं।