सीमेंट कंपनियों की नीतियों के खिलाफ किसानों का रोष, मुआवजा-रोजगार और ब्लास्टिंग रोकने की मांगें तेज
राजस्थान में सीमेंट कंपनियों की नीतियों को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। विभिन्न ग्रामीण इलाकों में किसानों ने विरोध जताते हुए कंपनियों पर मनमानी और स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है।
किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सीमेंट उद्योग से जुड़े कार्यों के कारण उनके जीवन और आजीविका पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें पर्याप्त मुआवजा और रोजगार अवसर नहीं दिए जा रहे हैं।
🌾 किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने अपनी मांगों में निम्न बिंदु प्रमुख रूप से उठाए हैं—
- प्रभावित भूमि और मकानों का उचित मुआवजा
- स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
- खनन क्षेत्रों में हो रही ब्लास्टिंग को तुरंत बंद किया जाए
- पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई की जाए
- पारदर्शी पुनर्वास नीति लागू की जाए
किसानों का कहना है कि ब्लास्टिंग और खनन गतिविधियों के कारण खेतों की उपजाऊ क्षमता प्रभावित हो रही है, साथ ही आसपास के घरों में दरारें आने की शिकायतें भी बढ़ रही हैं।
⚠️ पर्यावरण और जीवन पर असर का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि सीमेंट कंपनियों की गतिविधियों से धूल प्रदूषण और जल स्रोतों पर भी असर पड़ रहा है। इससे पशुपालन और खेती दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है, जिससे असंतोष और बढ़ता जा रहा है।
🏭 कंपनियों की नीतियों पर सवाल
किसानों ने आरोप लगाया है कि कंपनियां केवल औद्योगिक उत्पादन पर ध्यान दे रही हैं, जबकि स्थानीय समुदाय के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
📢 प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
आंदोलनरत किसानों ने जिला प्रशासन से तुरंत हस्तक्षेप कर वार्ता कराने और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
