नकली नंबर प्लेट से बढ़ी परेशानी, वीडियो में देंखे वाहन मालिकों को दूसरे राज्यों में कट रहे चालान और टोल
राजस्थान सहित कई राज्यों में वाहन मालिकों के सामने एक गंभीर और हैरान करने वाली समस्या सामने आई है। कई लोगों को ऐसे चालान और टोल कटने के मैसेज मिल रहे हैं, जिनकी गाड़ी उस समय न तो उस स्थान पर थी और न ही वहां मौजूद होने का कोई प्रमाण है।एक मामला सामने आया है जिसमें एक ट्रक मालिक का कहना है कि उसका ड्राइवर उस समय मध्य प्रदेश के ग्वालियर में वाहन लेकर गया हुआ था, लेकिन उसके मोबाइल पर गाजियाबाद में लेन नियम तोड़ने का 500 रुपए का चालान कटने का मैसेज आ गया। इसी तरह एक अन्य वाहन मालिक, जो जयपुर से अजमेर अपनी निजी कार से नियमित यात्रा करते हैं, उन्हें भी छुट्टी के दिन नई दिल्ली के टोल प्लाजा से टोल कटने के मैसेज मिले, जबकि उनकी गाड़ी घर पर ही खड़ी थी।
इस तरह की घटनाओं ने वाहन मालिकों को भ्रम और चिंता में डाल दिया है। कई लोग शुरुआत में इसे तकनीकी गड़बड़ी या सिस्टम एरर समझ रहे थे, लेकिन जांच में सामने आया है कि यह समस्या केवल तकनीकी नहीं है।दरअसल, कुछ मामलों में यह सामने आया है कि वाहन नंबर प्लेट की क्लोनिंग की जा रही है। यानी असली वाहन की नंबर प्लेट की नकल (डुप्लीकेट प्लेट) बनाकर अन्य वाहनों पर इस्तेमाल की जा रही है। ऐसे वाहन अलग-अलग राज्यों में घूमकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं और टोल प्लाजा से गुजरते हैं, लेकिन उसका भुगतान असली वाहन मालिक के फास्टैग खाते से कट जाता है।
इस तरह की धोखाधड़ी के कारण असली वाहन मालिकों को बिना किसी गलती के चालान भरने पड़ रहे हैं और टोल शुल्क भी उनके खाते से कट रहा है। वहीं अपराधी आसानी से टोल और ट्रैफिक नियमों से बच निकलते हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा और पहचान से जुड़ा मामला है, जिसमें नंबर प्लेट क्लोनिंग के जरिए सिस्टम को गुमराह किया जा रहा है। इससे न केवल आम नागरिकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
वाहन मालिकों ने इस समस्या को लेकर संबंधित विभागों से सख्त कार्रवाई और जांच की मांग की है। साथ ही फास्टैग और नंबर प्लेट सिस्टम को और अधिक सुरक्षित बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया जा रहा है। फिलहाल परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन से इस तरह की शिकायतों की जांच की उम्मीद की जा रही है, ताकि असली दोषियों तक पहुंचा जा सके और निर्दोष वाहन मालिकों को राहत मिल सके।
