फर्जी लोन ऐप्स से साइबर ठगी का खतरा बढ़ा, वीडियो में देंखे राजस्थान पुलिस ने जारी की चेतावनी
राजस्थान में इंस्टेंट लोन देने वाले फर्जी मोबाइल ऐप्स के जरिए साइबर ठगीके मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इन ऐप्स के माध्यम से लोगों को आकर्षक ऑफर देकर फंसाया जा रहा है और बाद में उनका निजी डेटा चोरी कर ब्लैकमेलिंग तक की घटनाएं सामने आ रही हैं।जानकारी के अनुसार, ऐसे ऐप्स पहले “5 मिनट में लोन”, “बिना दस्तावेज” और “कम ब्याज दर” जैसे आकर्षक ऑफर देकर लोगों को डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। एक बार ऐप इंस्टॉल होने के बाद उपयोगकर्ता से मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी, मैसेज और अन्य निजी डेटा तक की अनुमति ली जाती है।
इसके बाद ठग इसी डेटा का दुरुपयोग करते हुए लोगों को धमकाने, ब्लैकमेल करने और अतिरिक्त पैसे वसूलने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में समय पर किस्त न भर पाने पर पीड़ितों के रिश्तेदारों और परिचितों को भी डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आई हैं।इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन के लिए एडवाइजरी जारी की है और लोगों से ऐसे ऐप्स से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच जरूर करें और बिना जरूरत अत्यधिक परमिशन देने से बचें।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी.के. सिंह के मार्गदर्शन में जारी इस निर्देश में कहा गया है कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे हैं, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि:
- केवल अधिकृत और मान्यता प्राप्त ऐप्स का ही उपयोग करें
- किसी भी अनजान लोन ऐप को डाउनलोड न करें
- मोबाइल में कॉन्टैक्ट और गैलरी जैसी संवेदनशील परमिशन देने से पहले सावधानी बरतें
- किसी भी तरह की ब्लैकमेलिंग की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचित करें
साइबर क्राइम शाखा ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने में देरी न करें, ताकि अपराधियों पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
फिलहाल पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन लोन सेवाओं का उपयोग सोच-समझकर करें, ताकि वे इस तरह की साइबर ठगी से सुरक्षित रह सकें।
