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10 से 12 यूनिट ब्लड चढ़ाने के बाद भी नहीं सुधरी महिला की हालत, पति ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

10 से 12 यूनिट ब्लड चढ़ाने के बाद भी नहीं सुधरी महिला की हालत, पति ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप
 
10 से 12 यूनिट ब्लड चढ़ाने के बाद भी नहीं सुधरी महिला की हालत, पति ने इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

अस्पताल में भर्ती एक महिला की हालत लगातार बिगड़ने का मामला सामने आया है। महिला को ब्लीडिंग रोकने के लिए करीब 10 से 12 यूनिट ब्लड चढ़ाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ। महिला के पति ने आरोप लगाया है कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उनकी पत्नी की हालत लगातार बिगड़ती चली गई।

परिजनों के मुताबिक, महिला की हालत गंभीर होने के बाद डॉक्टरों ने ब्लीडिंग रोकने के लिए रक्त चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की। बताया जा रहा है कि महिला को कई यूनिट ब्लड दिया गया, लेकिन अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई।

पति ने इलाज में देरी का लगाया आरोप

महिला के पति का आरोप है कि उनकी पत्नी की हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि यदि शुरुआत में ही जरूरी इलाज और चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध करा दी जातीं तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से पूरे मामले की जानकारी मांगी है। साथ ही इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया और महिला की हालत बिगड़ने के कारणों की जांच की मांग की है।

परिजनों ने उठाए इलाज पर सवाल

परिवार का कहना है कि महिला की हालत गंभीर होने के बावजूद उन्हें लगातार चिंता बनी रही। ब्लीडिंग रोकने के लिए बड़ी मात्रा में रक्त चढ़ाए जाने के बाद भी हालत में सुधार नहीं होने से परिजनों ने इलाज की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

हालांकि, महिला की स्थिति बिगड़ने के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था, यह जांच और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

जांच के बाद साफ होगी स्थिति

मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से यदि जांच कराई जाती है तो इलाज के दौरान महिला को दी गई दवाओं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, डॉक्टरों की निगरानी और अन्य चिकित्सकीय प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा सकती है।

फिलहाल परिवार ने उचित इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए मामले की जांच की मांग की है। महिला की हालत और इलाज से जुड़े पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर मेडिकल रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।