GST के नए प्रस्ताव पर Esya सेंटर की चेतावनी: टैक्सी किराया बढ़ सकता है, वीडियो में जाने ड्राइवरों की आय घटने की आशंका
नीति और प्रौद्योगिकी शोध संस्थान Esya सेंटर ने जीएसटी व्यवस्था को लेकर जारी अपनी नई रिपोर्ट में सब्सक्रिप्शन आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित टैक्स नियम को लेकर चिंता जताई है। "Balancing Efficiency and Equity: Evidence from India's Technology-Intermediated Transport Services under the GST Regime" शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि जीएसटी कानून की धारा 9(5) के तहत ऐसे प्लेटफॉर्म को शामिल किया जाता है, तो इसका असर ड्राइवरों और यात्रियों दोनों पर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रस्ताव से ड्राइवरों की आय में कमी आ सकती है, यात्रियों को अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है और बिना बिल वाली ऑफ-प्लेटफॉर्म टैक्सी सेवाओं को बढ़ावा मिलने की आशंका है। इससे यात्रियों की सुरक्षा पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
ड्राइवर और यात्री को जोड़ने का माध्यम हैं ये प्लेटफॉर्म
रिपोर्ट में कहा गया है कि सब्सक्रिप्शन आधारित राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म केवल तकनीकी माध्यम के रूप में काम करते हैं। इनका मुख्य कार्य ड्राइवर और यात्री को जोड़ना होता है।ऐसे प्लेटफॉर्म न तो किराया तय करते हैं और न ही अधिकांश मामलों में भुगतान अपने माध्यम से प्राप्त करते हैं। किराया तय करने और भुगतान लेने की जिम्मेदारी सीधे ड्राइवर की होती है। ऐसे में इन प्लेटफॉर्म पर जीएसटी कानून की धारा 9(5) लागू करना कानूनी और व्यवहारिक दोनों दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
टैक्स व्यवस्था लागू करना होगा जटिल
Esya सेंटर का कहना है कि प्रस्तावित टैक्स व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं होगा। रिपोर्ट में इसे कानूनी रूप से जटिल और व्यवहारिक रूप से कठिन बताया गया है।शोध संस्थान के अनुसार, यदि ऐसे प्लेटफॉर्म पर अतिरिक्त कर भार डाला जाता है तो इसका प्रभाव अंततः ड्राइवरों और यात्रियों पर पड़ेगा। इससे कई ड्राइवर प्लेटफॉर्म छोड़कर नकद या ऑफ-प्लेटफॉर्म सेवाओं की ओर रुख कर सकते हैं।
सुरक्षा उपायों को टैक्स का आधार न बनाया जाए
रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए जाने वाले उपायों को किसी प्लेटफॉर्म के व्यावसायिक नियंत्रण का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।ड्राइवर सत्यापन, यात्रा की निगरानी, आपातकालीन सहायता और सुरक्षा से जुड़े अन्य फीचर्स यात्रियों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन सुविधाओं के आधार पर किसी प्लेटफॉर्म को टैक्स दायित्व के दायरे में लाना उचित नहीं होगा।
ऑफ-प्लेटफॉर्म सेवाओं को मिल सकता है बढ़ावा
रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि यदि प्रस्तावित जीएसटी नियम लागू होता है तो कुछ ड्राइवर प्लेटफॉर्म के बाहर सीधे ग्राहकों को सेवाएं देना शुरू कर सकते हैं। इससे बिना बिल वाली टैक्सी सेवाएं बढ़ सकती हैं और यात्रियों को मिलने वाली डिजिटल सुरक्षा सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।Esya सेंटर ने सुझाव दिया है कि सरकार टैक्स नीति बनाते समय तकनीकी प्लेटफॉर्म के संचालन मॉडल और उनकी वास्तविक भूमिका को ध्यान में रखे, ताकि डिजिटल परिवहन सेवाओं का विकास और यात्रियों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित की जा सके।
