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भारतीय सेना में AI की एंट्री, वीडियो में देखें दुश्मनों को चकमा देगी सेना की ये नई टेक्नीक, भविष्य के युद्ध की बदलेगी दिशा

भारतीय सेना में AI की एंट्री, वीडियो में देखें दुश्मनों को चकमा देगी सेना की ये नई टेक्नीक, भविष्य के युद्ध की बदलेगी दिशा
 
भारतीय सेना में AI की एंट्री, वीडियो में देखें दुश्मनों को चकमा देगी सेना की ये नई टेक्नीक, भविष्य के युद्ध की बदलेगी दिशा

भारतीय सेना अब पारंपरिक युद्ध प्रणाली से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित रणनीति की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। दुश्मनों को चकमा देने, जोखिम कम करने और तेज़ फैसले लेने के लिए सेना, नौसेना और वायुसेना में AI तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कश्मीर की पहाड़ियों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों और समुद्री सीमाओं तक, AI भारतीय सशस्त्र बलों के काम करने के तरीके को पूरी तरह बदल रहा है।

सेना में अब ऐसे रोबोटिक डॉग तैनात किए जा रहे हैं, जो बम पहचानने, संदिग्ध वस्तुओं की जांच करने और उबड़-खाबड़ रास्तों पर आसानी से चलने में माहिर हैं। ये रोबोटिक डॉग न केवल जवानों की जान जोखिम में डालने से बचाते हैं, बल्कि दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। सीमावर्ती इलाकों और आतंकरोधी अभियानों में इनकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।

वायुसेना में AI आधारित CELL AI सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मिशन प्लानिंग को पहले से कहीं अधिक प्रभावी बना रहा है। इस सिस्टम की मदद से यह तुरंत पता लगाया जा सकता है कि कौन सा विमान किसी मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है, किस मिशन में कितना खतरा है और कहां त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता है। AI डेटा का विश्लेषण कर कम समय में ऐसे सुझाव देता है, जिन पर पहले घंटों लग जाते थे।

वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, भारतीय सेना अब AI को केवल सहायक तकनीक के रूप में नहीं देख रही है। AI भविष्य के युद्ध का मुख्य आधार बनता जा रहा है। आधुनिक युद्ध केवल हथियारों की ताकत से नहीं, बल्कि सूचना, डेटा और निर्णय लेने की गति से जीते जाते हैं। AI इसी दिशा में भारत की सैन्य क्षमता को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है।

नौसेना भी समुद्री निगरानी के लिए AI आधारित सर्विलांस सिस्टम का उपयोग कर रही है। इन सिस्टम्स की मदद से समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों, दुश्मन जहाजों और ड्रोन मूवमेंट पर रियल टाइम नजर रखी जा रही है। इससे समुद्री सीमाओं की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है।

भारतीय AI सर्विलांस सिस्टम्स की तुलना अमेरिका के चर्चित ‘प्रोजेक्ट मेवन’ से की जा रही है। प्रोजेक्ट मेवन ने वीडियो एनालिसिस में लगने वाला समय करीब 70 प्रतिशत तक कम कर दिया था। इसी तरह भारतीय सेना के AI सिस्टम भी ड्रोन और सैटेलाइट से मिलने वाले वीडियो और डेटा का तेजी से विश्लेषण कर रहे हैं, जिससे खतरे की पहचान पहले ही हो जाती है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। AI आधारित हथियार प्रणाली, स्वचालित निगरानी और डेटा ड्रिवन फैसले युद्ध के परिणाम तय करेंगे। भारत का AI की ओर बढ़ता कदम न केवल उसकी रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर उसे तकनीकी रूप से सशक्त सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।