प्रसूताओं की मौत पर ऊर्जा मंत्री ने सरकार को घेरा, फुटेज में जानें चिकित्सा मंत्री को पत्र लिखकर कहा अधिकारी भ्रष्टाचार के लिए गलत फैसले कर रहे
कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल होने के लगातार सामने आ रहे मामलों ने गंभीर रूप ले लिया है। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है, जहां राज्य सरकार के ही दो मंत्रियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने अपनी ही सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर को पत्र लिखकर अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंत्री नागर ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में हालात बेहद चिंताजनक हैं और लापरवाही के कारण मरीजों की जान जा रही है।
प्रसूताओं की मौत और किडनी फेल के मामले
ऊर्जा मंत्री द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अब तक 4 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई महिलाओं की किडनी फेल होने और उनकी हालत गंभीर होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। आरोप है कि अस्पताल के इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर (OT) में फंगस और सीलन के कारण संक्रमण फैल रहा है, जिससे मरीजों की स्थिति बिगड़ रही है। मंत्री नागर ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
पत्र में यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण स्थिति बिगड़ती जा रही है, जिससे आम जनता का सरकारी अस्पतालों पर से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने इसे व्यवस्था की संवेदनहीनता और गंभीर विफलता बताया है।
अस्पताल के पास ही जश्न पर भी उठे सवाल
इस मामले में एक और विवाद सामने आया है। बताया जा रहा है कि अस्पताल से लगभग 100 मीटर की दूरी पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर अपने जन्मदिन का जश्न मना रहे थे। इस दौरान उन्होंने मंजीरे बजाए और लोगों को भोजन भी कराया। इस घटना को लेकर भी राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि एक तरफ अस्पताल में गंभीर हालात बने हुए थे, वहीं दूसरी ओर पास ही उत्सव का माहौल था।
बढ़ता राजनीतिक तनाव
इस पूरे मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। सरकार के भीतर से ही उठे सवालों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर नई बहस छेड़ दी है। विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है और अस्पताल की व्यवस्थाओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।
