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निम्बला स्कूल में भावुक विदाई समारोह: गुरु को शिष्य ने भेंट की दो तोला सोने की चेन, छलक उठीं आंखें

निम्बला स्कूल में भावुक विदाई समारोह: गुरु को शिष्य ने भेंट की दो तोला सोने की चेन, छलक उठीं आंखें
 
निम्बला स्कूल में भावुक विदाई समारोह: गुरु को शिष्य ने भेंट की दो तोला सोने की चेन, छलक उठीं आंखें

निकटवर्ती राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय निम्बला में मंगलवार को एक बेहद भावुक और यादगार दृश्य देखने को मिला, जब विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक साबिर मोहम्मद के सेवानिवृत्त होने पर पूरे स्कूल परिवार ने उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी। समारोह के दौरान शिक्षक, विद्यार्थी और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं। खास बात यह रही कि विद्यालय के प्रधानाचार्य हरिशंकर चौधरी ने अपने गुरु को गुरुदक्षिणा स्वरूप दो तोला सोने की चेन भेंट कर सम्मानित किया, जिसने पूरे कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।

विद्यालय प्रांगण में आयोजित विदाई समारोह में बड़ी संख्या में स्टाफ सदस्य, विद्यार्थी, पूर्व छात्र और गांव के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और स्वागत गीत से हुई। इसके बाद विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर अपने प्रिय शिक्षक के प्रति सम्मान व्यक्त किया। कई छात्र-छात्राओं ने मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि साबिर मोहम्मद ने उन्हें न केवल पढ़ाई में बल्कि जीवन के हर मोड़ पर मार्गदर्शन दिया।

प्रधानाचार्य हरिशंकर चौधरी ने अपने संबोधन में कहा, “आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें मेरे गुरु साबिर मोहम्मद का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने मुझे शिक्षा के साथ-साथ अनुशासन, ईमानदारी और समर्पण का पाठ पढ़ाया। गुरु का ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता, यह छोटी-सी भेंट मेरी ओर से सम्मान का प्रतीक है।” यह कहते हुए उन्होंने अपने गुरु को दो तोला सोने की चेन पहनाकर सम्मानित किया। इस दृश्य ने वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।

साबिर मोहम्मद ने लगभग तीन दशकों तक विद्यालय में अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने हजारों विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में अहम भूमिका निभाई। वे अपने सरल स्वभाव, समय पालन और विद्यार्थियों के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह हमेशा याद रखा जाएगा।

अपने उद्बोधन में साबिर मोहम्मद ने कहा, “विद्यालय मेरा परिवार रहा है। यहां बिताया हर पल मेरे लिए अनमोल है। विद्यार्थियों की सफलता ही मेरे जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।” उन्होंने सभी का आभार व्यक्त करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि इस सम्मान को वे जीवनभर संजोकर रखेंगे।

समारोह के अंत में सभी ने उन्हें पुष्पमालाएं पहनाकर शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस विदाई समारोह ने गुरु-शिष्य परंपरा की मिसाल पेश करते हुए शिक्षा जगत में एक प्रेरणादायक संदेश दिया।