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राजस्थान में दो से ज्यादा बच्चे वालों की चुनावी बाध्यता खत्म, वीडियो में देंखे पंचायतीराज और नगरपालिका संशोधन बिल गुरुवार को विधानसभा में पेश होंगे

राजस्थान में दो से ज्यादा बच्चे वालों की चुनावी बाध्यता खत्म, वीडियो में देंखे पंचायतीराज और नगरपालिका संशोधन बिल गुरुवार को विधानसभा में पेश होंगे
 
राजस्थान में दो से ज्यादा बच्चे वालों की चुनावी बाध्यता खत्म, वीडियो में देंखे पंचायतीराज और नगरपालिका संशोधन बिल गुरुवार को विधानसभा में पेश होंगे

राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव में दो से ज्यादा बच्चे वाले उम्मीदवारों के लिए लगी रोक अब समाप्त होने जा रही है। इसके लिए विधानसभा में गुरुवार को राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल-2026 और नगरपालिका संशोधन बिल-2026 पेश किए जाएंगे।

इस मामले में मदन दिलावर पंचायतीराज संशोधन बिल और झाबर सिंह खर्रा नगरपालिका संशोधन बिल सदन में पेश करेंगे। दोनों बिलों को पारित करवाने की तारीख गुरुवार को विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति की बैठक में तय की जाएगी।

इतिहास देखें तो साल 1995 में तत्कालीन भैरोंसिंह शेखावत सरकार ने पंचायतीराज और शहरी निकायों के चुनावों में दो से ज्यादा बच्चों वाले उम्मीदवारों पर रोक लगा दी थी। उस समय यह निर्णय जनसंख्या नियंत्रण और प्रशासनिक नीति के मद्देनजर लिया गया था। अब 31 साल बाद यह बाध्यता समाप्त होने जा रही है, जिससे ज्यादा बच्चे वाले भी स्थानीय चुनाव लड़ सकेंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस संशोधन से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अधिक लोगों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इससे पंचायत और नगर निकायों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ेगा और लोकतंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि यह बिल केवल दो से ज्यादा बच्चे वालों पर लगी रोक हटाने का नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को चुनावी अवसर देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। वहीं, UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा कि नगरपालिका संशोधन बिल से शहरी निकायों में भी इस बाध्यता को समाप्त किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस कदम से राज्य में चुनाव प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी और स्थानीय नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ेगी। इसके साथ ही यह कदम उन लोगों के लिए राहत की बात है, जिनके लिए पिछली नीति ने चुनावी अवसर सीमित कर दिए थे।

सालों से लागू रही यह नियमावली ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उम्मीदवारों की भागीदारी को प्रभावित कर रही थी। अब बाध्यता हटने से पंचायत और नगर निकायों में अधिक उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर सकेंगे, जिससे चुनाव प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा और लोकतांत्रिक सक्रियता बढ़ेगी।

विधानसभा में गुरुवार को पेश होने वाले ये बिल राज्य के स्थानीय शासन और लोकतंत्र के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखे जा रहे हैं। इससे यह संदेश भी जाएगा कि सरकार स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को अधिक अवसर देने और लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए कदम उठा रही है।

राजनीतिक और प्रशासनिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह संशोधन न केवल चुनावी प्रक्रिया में सुधार करेगा, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जनता की भागीदारी को भी बढ़ाएगा।