झालावाड़ में पहली बार ड्रैगन फ्रूट की खेती, संतरे के बगीचे में लगाए 400 पौधे; 25 साल तक मिलेगा उत्पादन
राजस्थान के झालावाड़ जिले में किसानों ने खेती में नवाचार की नई मिसाल पेश की है। जिले में पहली बार ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की गई है। एक किसान ने संतरे के बगीचे में खाली पड़ी जमीन का उपयोग करते हुए ड्रैगन फ्रूट के 400 पौधे लगाए हैं। खास बात यह है कि इन पौधों से करीब 25 साल तक फल मिलने की उम्मीद है।
झालावाड़ पहले से ही संतरे की खेती के लिए प्रसिद्ध है। यहां के किसान लंबे समय से संतरे के बगीचों से अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। अब एक किसान ने पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए संतरे के बगीचे के बीच खाली जगह में ड्रैगन फ्रूट की खेती का प्रयोग शुरू किया है। इससे एक ही जमीन से दो तरह की फसल लेने की संभावना बढ़ गई है।
ड्रैगन फ्रूट की खेती को कम पानी में अच्छी आमदनी देने वाली फसल माना जाता है। इसके पौधे लगाने के बाद उचित देखभाल के साथ लंबे समय तक उत्पादन लिया जा सकता है। किसान के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट के पौधों को तैयार होने में कुछ समय लगता है, लेकिन एक बार फल देना शुरू करने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है।
किसान ने बताया कि संतरे के पेड़ों के बीच खाली जगह का सही उपयोग करने के उद्देश्य से ड्रैगन फ्रूट की खेती का निर्णय लिया गया। इसके लिए करीब 400 पौधे लगाए गए हैं। खेती के इस प्रयोग से उम्मीद है कि आने वाले समय में अतिरिक्त आय का नया स्रोत तैयार होगा।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान के कई इलाकों में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसकी मांग बाजार में लगातार बढ़ रही है और अच्छी कीमत मिलने के कारण किसान इसे लाभकारी फसल के रूप में अपना रहे हैं। हालांकि, बेहतर उत्पादन के लिए पौधों की देखभाल, सिंचाई व्यवस्था और सही तकनीक का पालन जरूरी होता है।
झालावाड़ में शुरू हुआ यह प्रयोग दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। यदि यह प्रयास सफल रहता है तो जिले के अन्य किसान भी संतरे और अन्य बागवानी फसलों के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
कृषि क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलावों के बीच झालावाड़ के किसान का यह कदम खेती में विविधता और आधुनिक तकनीक अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। आने वाले वर्षों में ड्रैगन फ्रूट की खेती जिले के किसानों के लिए कमाई का नया जरिया बन सकती है।
