डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी चुनाव के बाद बवाल, वीडियो में जानें पूर्व डीजीपी सहित कई लोगों पर केस दर्ज
जयपुर में डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी के चुनाव के बाद बड़ा विवाद सामने आया है। चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद कथित तौर पर हुए हंगामे, मारपीट, धमकी और लूट के आरोपों को लेकर गांधीनगर थाना पुलिस ने राजस्थान के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रवि प्रकाश मेहरड़ा, उनके भाई प्रशांत मेहरड़ा सहित एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इस घटनाक्रम से राजधानी में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है।
पुलिस के अनुसार, यह एफआईआर सोसायटी के लेटरपैड पर देवदत्त सिंह की ओर से गांधीनगर थाने में दर्ज करवाई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चुनाव संपन्न होने के बाद एक पक्ष ने जबरन हंगामा किया, मारपीट की, धमकियां दीं और लूटपाट की। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस दौरान सोसायटी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई लोगों को चोटें भी आईं।
एफआईआर में आरोप है कि चुनाव परिणामों को लेकर हुए विवाद के बाद माहौल अचानक बिगड़ गया। कथित तौर पर आरोपियों ने दबाव बनाने और डराने की नीयत से हिंसा का सहारा लिया। शिकायतकर्ता ने पुलिस से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, पूर्व डीजीपी रवि प्रकाश मेहरड़ा के भाई प्रशांत मेहरड़ा की ओर से भी गांधीनगर थाने में एक अलग एफआईआर दर्ज करवाई गई है। इस शिकायत में दूसरे पक्ष पर फर्जी वोटिंग करवाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया के दौरान नियमों का उल्लंघन करते हुए अवैध रूप से वोट डलवाए गए, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
गांधीनगर थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर अलग-अलग मामले दर्ज कर लिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि चुनाव से जुड़े पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और चुनाव से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके।
पुलिस ने बताया कि फिलहाल किसी की गिरफ्तारी नहीं की गई है, लेकिन जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोनों पक्षों को शांति बनाए रखने की हिदायत दी गई है।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सामाजिक संगठनों के चुनावों में बढ़ते तनाव और आपसी टकराव को उजागर किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामाजिक संस्थाओं के चुनावों को शांतिपूर्ण और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन को सख्त व्यवस्था करनी चाहिए। फिलहाल, गांधीनगर थाना पुलिस दोनों मामलों की जांच में जुटी हुई है और आने वाले दिनों में इस विवाद को लेकर और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
