शहर में कुत्तों का आतंक: रविवार को किशोर पर हमला, अस्पताल आंकड़ों से खुलासा औसतन रोज दो लोग शिकार
शहर की गलियों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को एक किशोर को गली में श्वान ने पैर में दो जगह काट लिया। स्थानीय अस्पताल के आंकड़े भी इस भयावह स्थिति की पुष्टि कर रहे हैं। अस्पताल में मरीजों के रिकार्ड के अनुसार औसतन हर दिन दो लोग कुत्तों के हमले का शिकार बन रहे हैं।
घटना की जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी ने बताया कि किशोर घर से बाहर खेल रहा था तभी अचानक कुत्तों ने उस पर हमला कर दिया। पैर में गंभीर चोटें आई हैं और उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद किशोर की हालत स्थिर है, लेकिन घाव की गंभीरता को देखते हुए उसकी निगरानी जारी है।
अस्पताल सूत्रों ने बताया कि आवारा कुत्तों के हमले के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों से रोजाना दो से तीन लोग ऐसे हमले की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचते हैं। इनमें अधिकांश बच्चे और किशोर हैं, क्योंकि वे गलियों में खेलने जाते हैं और कुत्तों के संपर्क में आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण से बाहर हो चुकी है। न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा है, बल्कि ऐसे हमले सामाजिक और मानसिक असर भी डालते हैं। कुत्तों के काटने से गंभीर संक्रमण, रेबीज़ जैसी जानलेवा बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
नगर निगम और प्रशासन के अधिकारी पिछले कुछ महीनों से इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कदम उठा रहे हैं। फिलहाल कई क्षेत्रों में तात्कालिक तरीके से कुत्तों को पकड़ा जा रहा है और टीकाकरण अभियान भी चलाया जा रहा है। हालांकि, शहर में अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां आवारा कुत्तों का आतंक आम लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
स्थानीय लोग प्रशासन से सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बच्चों और वृद्धों के लिए गलियों में निकलना अब जोखिम भरा हो गया है। इसके साथ ही लोगों ने आवारा कुत्तों की संख्या कम करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से रख-रखाव करने की भी अपील की है।
विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए सामुदायिक जागरूकता और शिक्षा पर जोर दिया जाए। बच्चों को कुत्तों के संपर्क में आने से रोकने, सावधानी बरतने और तुरंत मदद लेने की जानकारी दी जानी चाहिए।
रविवार को हुए इस नवीनतम हमले ने फिर से यह दिखा दिया है कि शहर में आवारा कुत्तों का खतरा गंभीर रूप ले चुका है। अब यह प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय समुदाय के लिए चुनौती है कि वे मिलकर इस समस्या का स्थायी और सुरक्षित समाधान निकालें।
