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दिलावर बोले- स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर पाबंदी नहीं, CJP बोलीं- जर्जर स्कूल ठीक करें या मेरे खिलाफ FIR दर्ज करा दें

दिलावर बोले- स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर पाबंदी नहीं, CJP बोलीं- जर्जर स्कूल ठीक करें या मेरे खिलाफ FIR दर्ज करा दें
 
दिलावर बोले- स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर पाबंदी नहीं, CJP बोलीं- जर्जर स्कूल ठीक करें या मेरे खिलाफ FIR दर्ज करा दें

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की स्थिति और स्कूल परिसरों में मीडिया की एंट्री को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और राजस्थान हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस के बीच तल्ख टिप्पणी सामने आई है। शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी स्कूलों में मीडिया के प्रवेश पर कोई पाबंदी नहीं है। वहीं, चीफ जस्टिस ने जर्जर स्कूल भवनों और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सरकार को सख्त संदेश दिया।

स्कूलों में मीडिया की एंट्री पर दिलावर का बयान

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सरकारी स्कूलों में मीडिया के प्रवेश पर रोक नहीं लगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार स्कूलों में जाकर व्यवस्थाओं और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति देख सकते हैं।

हालांकि, स्कूलों में बच्चों की फोटो और वीडियो बनाने को लेकर अनुमति जैसी व्यवस्थाओं पर पहले से चर्चा होती रही है। ऐसे में शिक्षा मंत्री के बयान के बाद इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।

जर्जर स्कूलों को लेकर चीफ जस्टिस सख्त

मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों को लेकर सरकार पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला बेहद गंभीर है और सरकार को जर्जर स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार जर्जर स्कूलों को ठीक करे या उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर सरकार को लगता है कि उनके आदेश या टिप्पणी के कारण कोई मामला बनता है तो उनके खिलाफ पहले से ही FIR दर्ज करवा दी जाए।

बच्चों की सुरक्षा पर उठे सवाल

राजस्थान के कई सरकारी स्कूलों में भवनों की खराब स्थिति, प्लास्टर गिरने और बारिश के दौरान भवनों को होने वाले नुकसान के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अदालत ने सरकार से स्कूलों की स्थिति को गंभीरता से लेने और आवश्यक मरम्मत कार्य कराने की जरूरत पर जोर दिया। जर्जर भवनों में बच्चों की कक्षाएं संचालित होने से किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है।

मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा

सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति सामने लाने में मीडिया की भूमिका को लेकर भी बहस तेज हुई है। यदि किसी स्कूल की इमारत जर्जर है या वहां बच्चों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं तो मीडिया रिपोर्टिंग के जरिए इन समस्याओं को सामने लाया जा सकता है।

शिक्षा मंत्री के मुताबिक मीडिया की एंट्री पर कोई सामान्य रोक नहीं है। वहीं, बच्चों की निजता और सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी माना जा रहा है।

सरकार के सामने स्कूलों की व्यवस्था सुधारने की चुनौती

कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद अब सरकार के सामने सरकारी स्कूलों की इमारतों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर प्रभावी कदम उठाने की चुनौती है। खासकर बारिश के मौसम में कमजोर भवनों और गिरते प्लास्टर जैसी घटनाएं बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती हैं।

मामले में आगे होने वाली सुनवाई और सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले जवाब पर नजर रहेगी। वहीं, शिक्षा विभाग को स्कूलों की स्थिति का आकलन कर आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।