बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का पुष्कर में विवादित बयान, अजमेर दरगाह पर जताई आपत्ति
धार्मिक गुरु और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मंगलवार को पुष्कर में आयोजित हनुमंत कथा के दौरान एक विवादित बयान दिया। उन्होंने कहा कि अजमेर में हिंदुओं के चादर चढ़ाने से उन्हें दिक्कत है। शास्त्री ने अपनी राय व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि उनकी इच्छा है कि अजमेर जिले के पुष्कर में एक मठ बनाया जाए, ताकि हिंदू श्रद्धालु सीधे मठ में आकर अपनी पूजा-अर्चना कर सकें।
धीरेंद्र शास्त्री ने अपने भाषण में कहा कि धार्मिक स्थलों और रीति-रिवाजों के माध्यम से सांस्कृतिक और धार्मिक जागरूकता बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह कदम धार्मिक समुदायों को संपर्क और समझ बढ़ाने का अवसर प्रदान करेगा।
हालांकि, उनके बयान को सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर लेकर तेज बहस शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी सांप्रदायिक भावना को भड़का सकती है, जबकि समर्थक इसे धार्मिक दृष्टि और संस्कृति के संरक्षण का प्रयास मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक नेताओं के बयान अक्सर समाज में गहरी प्रतिक्रिया पैदा करते हैं। पुष्कर जैसे तीर्थस्थलों पर दिए गए इस प्रकार के बयान राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक बहस का कारण बन सकते हैं।
स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल इस मामले में किसी तरह की कार्रवाई की पुष्टि नहीं की है। वहीं, सामाजिक संगठनों ने इस बयान पर निगरानी रखने और किसी भी प्रकार के विवाद से बचने की अपील की है।
धीरेंद्र शास्त्री की इस पहल ने राजस्थान और अन्य राज्यों में धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक पहचान को लेकर बहस को फिर से ताजा कर दिया है। धर्मगुरु के इस बयान ने स्पष्ट किया कि धार्मिक नेतृत्व का उद्देश्य केवल पूजा-अर्चना नहीं, बल्कि समाज में धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण भी होना चाहिए।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि धार्मिक नेताओं के सुझाव और विचार समाज में संवेदनशील मुद्दों पर प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए समाज और प्रशासन को इस तरह के मामलों में संतुलित दृष्टिकोण और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान ने पुष्कर में उपस्थित श्रद्धालुओं और जनता के बीच चर्चा और ध्यान आकर्षित किया है। अब देखना यह है कि प्रशासन और समाज इस विषय पर किस तरह संतुलित और संवेदनशील कदम उठाते हैं।
