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जयपुर में बाल विवाह रोकने के प्रयासों के बावजूद आंकड़े लगातार बढ़ रहे

जयपुर में बाल विवाह रोकने के प्रयासों के बावजूद आंकड़े लगातार बढ़ रहे
 
जयपुर में बाल विवाह रोकने के प्रयासों के बावजूद आंकड़े लगातार बढ़ रहे

बाल विवाह रोकने के लिए सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जयपुर सहित राजस्थान के कई इलाकों में इस परंपरा पर लगाम नहीं लग पा रही है। साल-दर-साल बाल विवाह के आंकड़े बढ़ते जा रहे हैं, और लोग अपने कम उम्र के बच्चों की शादी कराने से नहीं हिचकिचा रहे हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बाल विवाह के मामले बढ़े हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि आर्थिक तंगी, परंपरागत सोच और जागरूकता की कमी इस समस्या को और बढ़ावा दे रही है। कई परिवार अब भी यह मानते हैं कि बच्चों की शादी कम उम्र में कराना बेहतर होता है।

राज्य सरकार ने बाल विवाह रोकने के लिए कई कानून और अभियान शुरू किए हैं। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। इसके अलावा, महिला एवं बाल विकास विभाग नियमित रूप से जागरूकता अभियान चला रहा है और पंचायत स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षक बताते हैं कि शिक्षा की कमी और जागरूकता के अभाव में लोग अक्सर इस परंपरा का पालन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर बाल विवाह के मामले सामने आते हैं। कई बार माता-पिता अपने बच्चों की सुरक्षा और भविष्य के नाम पर जल्दी शादी कर देते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बाल विवाह न केवल शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है, बल्कि बच्चों के शिक्षा और करियर पर भी नकारात्मक असर डालता है। कम उम्र में शादी होने से किशोरियों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, जैसे प्रजनन समस्याएं और मानसिक तनाव, बढ़ जाते हैं। वहीं लड़कों के लिए भी जिम्मेदारी की जल्दी पड़ने से शिक्षा और करियर प्रभावित होता है।

अधिकारियों का कहना है कि बाल विवाह रोकने के प्रयासों में समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है। पंचायत, स्कूल और स्थानीय नागरिकों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। जागरूकता अभियान, स्थानीय हेल्पलाइन और नियमित जांच से बाल विवाह के मामलों में कमी लाई जा सकती है।

पिछले कुछ सालों में बाल विवाह के खिलाफ चलाए गए अभियान और स्थानीय शिकायत प्रणाली ने कुछ हद तक असर दिखाया है, लेकिन अब भी लोगों की 'जिद' जारी है। अधिकारी बताते हैं कि कुछ परिवार अब भी कानून का उल्लंघन करने में संकोच नहीं कर रहे हैं और अपने बच्चों की शादी करवा रहे हैं।

समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सख्त कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ धार्मिक और सांस्कृतिक नेताओं की भूमिका भी अहम मानी जा रही है। बच्चों के भविष्य और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए सभी स्तरों पर सतर्कता आवश्यक है।

जयपुर में बाल विवाह के बढ़ते मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल कानून और अभियान पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज को सक्रिय और जागरूक होना होगा। बाल विवाह रोकने के लिए सरकार, पंचायत और समाज को मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठाने होंगे।