8 मामलों में बरी होने के बावजूद एक केस में जेल बरकरार, हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपियों की याचिका
राजस्थान में लंबे समय से चल रहे एक बहुचर्चित आतंकी हमले से जुड़े मामले में अदालत का बड़ा फैसला सामने आया है। जिन आरोपियों को आठ अन्य ब्लास्ट मामलों में पहले ही बरी किया जा चुका है, वे अब भी एक मामले में दोषसिद्धि के चलते जेल में बंद रहेंगे।
जानकारी के अनुसार, इन आरोपियों ने अपनी सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर राहत की मांग की थी। उनका तर्क था कि जब अन्य आठ मामलों में उन्हें बरी कर दिया गया है, तो इस एक मामले में भी उन्हें जमानत या सजा पर रोक दी जानी चाहिए।
हालांकि, अदालत ने सुनवाई के बाद उनकी अर्जी खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि जिस मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया है, उसमें उपलब्ध साक्ष्य और निचली अदालत का निर्णय फिलहाल पर्याप्त आधार रखते हैं, और इस स्तर पर हस्तक्षेप उचित नहीं है।
इस फैसले के बाद आरोपियों की जेल से रिहाई की उम्मीदों को झटका लगा है और उन्हें अभी न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार करना होगा।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला सालों पुराने सीरियल ब्लास्ट मामलों से जुड़ा हुआ है, जिसमें देशभर में कई जगहों पर धमाकों की घटनाएं हुई थीं। जांच एजेंसियों ने लंबे समय तक जांच के बाद कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था और विभिन्न मामलों में मुकदमे चलाए गए थे।
हालांकि, अलग-अलग मामलों में अलग-अलग सबूतों के आधार पर कुछ मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया, लेकिन एक केस में दोषसिद्धि कायम रहने के कारण उनकी सजा जारी है।
फिलहाल इस निर्णय के बाद कानूनी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और माना जा रहा है कि आरोपी पक्ष आगे सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकता है।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक ही प्रकरण से जुड़े अलग-अलग मामलों में अलग-अलग फैसले आते हैं, तो न्यायिक प्रक्रिया की जटिलता कितनी बढ़ जाती है।
