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भीलवाड़ा में होलिका दहन, धुलंडी और चंद्र ग्रहण की तारीखों पर निर्णय, उत्सव शांति और नियमों के साथ मनाए जाएंगे

भीलवाड़ा में होलिका दहन, धुलंडी और चंद्र ग्रहण की तारीखों पर निर्णय, उत्सव शांति और नियमों के साथ मनाए जाएंगे
 
भीलवाड़ा में होलिका दहन, धुलंडी और चंद्र ग्रहण की तारीखों पर निर्णय, उत्सव शांति और नियमों के साथ मनाए जाएंगे

भीलवाड़ा में इस वर्ष होली और संबंधित पर्वों को लेकर चल रहे असमंजस और मतभेदों पर अब विराम लग गया है। पेच के बालाजी के महंत पंडित आशुतोष शर्मा ने विभिन्न विद्वानों, ज्योतिषाचार्यों और पंचांगों का गहन विश्लेषण करने के बाद सर्वमान्य निर्णय जारी किया है।

महंत पंडित आशुतोष शर्मा के अनुसार, इस वर्ष होली का पर्व तीन महत्वपूर्ण चरणों में मनाया जाएगा। पहले चरण में होली का दहन 2 मार्च को किया जाएगा। इस अवसर पर पारंपरिक रूप से होलिका दहन का अनुष्ठान किया जाएगा, जिसमें पवित्र आग के माध्यम से बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक मनाया जाता है।

दूसरे चरण में, रंगों का पर्व धुलंडी 3 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन का विशेष महत्व इस बार इसलिए बढ़ गया है क्योंकि इसे चंद्र ग्रहण के साए के बीच उल्लास और आनंद के साथ मनाया जाएगा। महंत आशुतोष शर्मा ने कहा कि ग्रहों और पंचांग के अनुसार इस दिन का समय विशेष रूप से शुभ है, इसलिए लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ पर्व मनाएं।

तीसरे चरण में, शीतला अष्टमी का पर्व इस बार 11 मार्च को मनाया जाएगा। महंत ने बताया कि इसी दिन दोपहर दो बजे के बाद मुर्दे की सवारी (जिंदा आदमी की शवयात्रा) का अनुष्ठान किया जाएगा। उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया है कि इस समय पवित्रता और नियमों का पालन करते हुए आयोजनों में शामिल हों।

महंत पंडित आशुतोष शर्मा ने यह भी कहा कि सभी स्थानीय समाज, परिवार और मंदिर इन पर्वों के आयोजन में पंचांग और ज्योतिषाचार्य द्वारा सुझाए गए समय का पालन करें। इससे न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक नियमों का सम्मान होगा, बल्कि त्योहारों का आनंद और सामूहिक उत्साह भी बढ़ेगा।

स्थानीय लोग महंत के निर्णय से काफी संतुष्ट हैं और उन्होंने कहा कि इससे समाज में चल रहे मतभेद और भ्रम दूर होंगे। लोगों ने बताया कि लंबे समय से होली और संबंधित पर्वों के सही समय को लेकर विवाद चल रहा था, लेकिन अब निर्णय से सभी वर्गों और समुदायों में एकता और सामूहिक उत्सव का माहौल बनेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पारंपरिक और धार्मिक उत्सवों में सही समय और विधि का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इससे न केवल धार्मिक आस्था का सम्मान होता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द और अनुशासन भी बढ़ता है।

अंततः, भीलवाड़ा में होली, धुलंडी और शीतला अष्टमी के पर्व अब सटीक समय और पंचांग अनुसार मनाए जाएंगे। महंत पंडित आशुतोष शर्मा द्वारा जारी सर्वमान्य निर्णय ने स्थानीय समाज को स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है और इस वर्ष के त्योहारों में उत्साह, श्रद्धा और सामूहिक आनंद की भावना को मजबूत किया है।