राजस्थान विधानसभा में जिले खत्म करने के मुद्दे पर फिर छिड़ी बहस, विपक्ष ने किया हंगामा

कांग्रेस ने चुनावी दांव खेला
पटेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जाते जाते चुनावी दांव खेलते हुए जिले बनाए थे। उनका कहना था कि एक जिले के गठन में 800 से 1 हजार करोड़ रुपए तक का खर्चा आता है, लेकिन सरकार ने जिले बनाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की। बिना कोई पृष्ठभूमि तैयार किए सरकार ने जिले इस मंशा से बनाए कि जिससे कांग्रेस की सरकार रिपीट हो जाएगी। इस पर विपक्ष के सदस्य फिर नाराज होकर वेल में आ गए। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
पंवार कमेटी पर लगाए आरोप
इससे पहले कांग्रेस के सुरेश मोदी ने जिलों की समीक्षा करने वाली ललित के पंवार कमेटी पर सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया। पंवार कमेटी ने तो नीम का थाना का दौरा तक नहीं किया। उन्होंने कहा, शेखावाटी में भाजपा को जो हार मिली है, उसका बदला नीम का थाना से जिले का दर्जा और सीकर से संभाग का दर्जा छीनकर लिया गया।वहीं दूसरे विधायक कांग्रेस के ही रामकेश मीना ने कहा कि पंवार तो भाजपा के सदस्य रह चुके हैं। उनसे न्याय की क्या उम्मीद की जाए। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि यह गंभीर विषय है यह नहीं बताया कि कौनसा जिला किस तथ्य के आधार पर खत्म किया गया।
मंत्री घुमाते रहे, विपक्ष हुआ नाराज
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने जवाब में कहा कि सरकार के पास जिले-संभाग बनाने व खत्म करने का अधिकार है। पटेल ने जिलों को लेकर होईकोर्ट की टिप्पणी भी पढ़ी। इस दौरान बीच में विपक्ष की टोकाटाकी चलती रही, लेकिन विपक्ष सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। अध्यक्ष देवनानी ने पटेल से कहा कि दो मिनट में जवाब खत्म करें, लेकिन पटेल दो जिलों तक सीमित नहीं रहकर पुराना इतिहास पढ़ने लगे।