Aapka Rajasthan

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी, फुटेज में देंखे भीलवाड़ा में दो महिलाओं की मौत; जुलाई में 7वीं घटना

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी, फुटेज में देंखे भीलवाड़ा में दो महिलाओं की मौत; जुलाई में 7वीं घटना
 
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत का सिलसिला जारी, फुटेज में देंखे भीलवाड़ा में दो महिलाओं की मौत; जुलाई में 7वीं घटना

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के दौरान महिलाओं की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल में बुधवार देर रात दो प्रसूताओं की मौत हो गई। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दोनों महिलाओं की नॉर्मल डिलीवरी हुई थी और वे किसी भी तरह की हाई रिस्क प्रेग्नेंसी श्रेणी में शामिल नहीं थीं। प्रसव के बाद अधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने के कारण उनकी हालत बिगड़ी और इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में जुलाई महीने में ही अलग-अलग कारणों से अब तक 7 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रसव के बाद अचानक बिगड़ी हालत

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) संजीव शर्मा ने बताया कि दोनों मृतक महिलाएं सामान्य गर्भावस्था वाली थीं। उन्होंने कहा कि प्रसव के बाद अचानक जटिलताएं सामने आईं, जिसके कारण अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उन्हें बचाया नहीं जा सका।अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि दोनों मामलों में डॉक्टरों की टीम ने इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन स्थिति गंभीर होने के कारण महिलाओं की जान नहीं बचाई जा सकी।

पहले भी सामने आ चुके हैं मामले

राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के मामले पहले भी चिंता बढ़ा चुके हैं। इससे पहले मई महीने में कोटा में 5 प्रसूताओं की मौत का मामला सामने आया था। वहीं, जून में बीकानेर में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 6 प्रसूताओं की किडनी फेल होने की घटना ने भी स्वास्थ्य विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया था। इनमें से दो महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।लगातार हो रही घटनाओं के बाद सरकारी अस्पतालों में प्रसव व्यवस्था, इमरजेंसी सेवाओं और ऑपरेशन के बाद निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग कर रहा समीक्षा

प्रसूताओं की मौत के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों से रिपोर्ट मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि हर मामले की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या रहे।विशेषज्ञों के अनुसार, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) मातृ मृत्यु का एक बड़ा कारण होता है। ऐसे मामलों में तुरंत चिकित्सा सहायता और ब्लड की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है।

भीलवाड़ा में सामने आए ताजा मामलों के बाद एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज हो गई है। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच और रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन घटनाओं में किसी स्तर पर लापरवाही रही या नहीं।