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रात 8 बजे बाद साइबर ठगी से निपटना चुनौती, सिस्टम देख रहा लेकिन ठग निकाल ले रहे पैसे; बैंककर्मियों की कमी से बढ़ी परेशानी

 
रात 8 बजे बाद साइबर ठगी से निपटना चुनौती, सिस्टम देख रहा लेकिन ठग निकाल ले रहे पैसे; बैंककर्मियों की कमी से बढ़ी परेशानी

डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। साइबर अपराधियों पर नजर रखने के लिए सिस्टम और निगरानी तंत्र मौजूद हैं, लेकिन कई बार ठगों को समय रहते रोकना चुनौती बन जाता है। खासतौर पर रात 8 बजे के बाद होने वाली धोखाधड़ी की घटनाओं में कार्रवाई में देरी की समस्या सामने आ रही है।

जानकारी के मुताबिक, साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद तुरंत बैंकिंग सिस्टम के जरिए संदिग्ध खातों को फ्रीज कराने की कोशिश की जाती है, लेकिन कई मामलों में ठग शिकायत दर्ज होने से पहले ही खाते से रकम निकाल लेते हैं। इससे पीड़ितों को अपना पैसा वापस पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

बैंककर्मियों की कमी से बढ़ रही परेशानी

साइबर अपराध से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी चुनौती बैंकिंग व्यवस्था से तत्काल समन्वय की होती है। रात के समय कई बैंक शाखाओं में कर्मचारी उपलब्ध नहीं होते, जिससे संदिग्ध ट्रांजेक्शन पर तुरंत रोक लगाने में परेशानी आती है।

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ठगी के शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इस दौरान बैंक खाते को फ्रीज कर दिया जाए तो पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। लेकिन बैंकिंग स्टाफ की सीमित उपलब्धता के कारण कई बार कार्रवाई में देरी हो जाती है।

सिस्टम अलर्ट देता है, फिर भी बच निकलते हैं ठग

साइबर सुरक्षा व्यवस्था संदिग्ध गतिविधियों को पहचानने के लिए लगातार काम कर रही है। कई मामलों में असामान्य लेन-देन, अचानक बड़ी रकम ट्रांसफर होने या संदिग्ध खातों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है।

इसके बावजूद साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर सिस्टम को चकमा देने की कोशिश करते हैं। फर्जी कॉल, ऑनलाइन लिंक, डिजिटल पेमेंट फ्रॉड और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

शिकायत में देरी पड़ती है भारी

साइबर ठगी का शिकार होने के बाद कई लोग तुरंत शिकायत नहीं करते। समय बीतने के साथ ठग कई खातों के जरिए पैसे ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे रकम को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ठगी की जानकारी मिलते ही पीड़ितों को तुरंत साइबर हेल्पलाइन और संबंधित बैंक को सूचना देनी चाहिए, ताकि जल्द से जल्द कार्रवाई की जा सके।

साइबर अपराध रोकने के लिए बढ़ रही तैयारी

प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। संदिग्ध खातों की निगरानी, डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

हालांकि, साइबर ठगी को रोकने के लिए तकनीकी व्यवस्था के साथ-साथ बैंकिंग सिस्टम में 24 घंटे बेहतर समन्वय और तेज कार्रवाई की जरूरत भी महसूस की जा रही है।