जयपुर में 24 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, वीडियो में जाने क्रिप्टो हवाला सिंडिकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार; मजदूरों के नाम पर खुलवाता था बैंक खाते
जयपुर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड, फर्जी बैंक खातों और क्रिप्टो हवाला सिंडिकेट का खुलासा करते हुए शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने इस नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड विकास ढाका पुत्र राजेंद्र ढाका को वैशाली नगर स्थित उसके फ्लैट से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर पिछले दो साल में साइबर ठगी से जुटाए गए करीब 24 करोड़ रुपए को बैंक खातों के जरिए व्हाइट मनी में बदलने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी गरीब और मजदूर वर्ग के लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।आरोपी सीकर जिले के बासनी बराला गांव का रहने वाला है। बताया जा रहा है कि वह करीब 20 दिन पहले अपने नेटवर्क का विस्तार करने के लिए जयपुर आया था। वैशाली नगर थाना पुलिस ने उसके फ्लैट से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद किए हैं।
मजदूरों और गरीबों को लालच देकर खुलवाता था खाते
पुलिस जांच के अनुसार, विकास ढाका ऐसे लोगों को निशाना बनाता था, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। वह उन्हें कमीशन या आर्थिक लाभ का लालच देकर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद इन खातों की बैंकिंग जानकारी और डेबिट कार्ड अपने नेटवर्क के जरिए इस्तेमाल करता था।साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी। फिर अलग-अलग खातों और वित्तीय माध्यमों से रकम को ट्रांसफर कर उसे वैध कमाई जैसा दिखाने की कोशिश की जाती थी। पुलिस को शक है कि इस पूरे नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हैं।
USDT और क्रिप्टो करेंसी के जरिए चल रहा था नेटवर्क
डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि 27 अक्टूबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि वैशाली नगर की नेमी सागर कॉलोनी स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में विकास ढाका अपने साथियों के साथ रह रहा है। सूचना में बताया गया था कि वह USDT और क्रिप्टो करेंसी के जरिए अवैध लेनदेन और साइबर फ्रॉड का बड़ा नेटवर्क चला रहा है।इसके बाद पुलिस ने सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए फ्लैट पर दबिश दी और विकास ढाका को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान वहां से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन, डेबिट कार्ड किट और गूगल पे स्कैनर रोल बरामद हुए।
दो साल में 24 करोड़ रुपए बदलने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिछले दो वर्षों में साइबर ठगी से जुटाए गए करीब 24 करोड़ रुपए को व्हाइट मनी में बदल चुका है। जांच एजेंसियां अब इस रकम के लेनदेन, बैंक खातों और क्रिप्टो करेंसी के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही हैं।
नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश
पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसने कितने लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए, ठगी की रकम किन-किन खातों में पहुंची और क्रिप्टो करेंसी के जरिए किन लोगों तक पैसा भेजा गया।पुलिस को आशंका है कि इस सिंडिकेट का नेटवर्क जयपुर के अलावा दूसरे राज्यों और विदेशों तक भी फैला हो सकता है। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और पूछताछ के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
