CRPF जवान नंदकिशोर प्रजापति को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई, नीमच कांड से उठे कई सवाल
मध्यप्रदेश के नीमच स्थित सीआरपीएफ छावनी में कंकाल के रूप में मिले जवान नंदकिशोर प्रजापति का मंगलवार को राजस्थान के भीम में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही पार्थिव अवशेष उनके पैतृक क्षेत्र पहुंचे, परिजनों और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
बताया जा रहा है कि नंदकिशोर प्रजापति 27 दिसंबर से लापता थे। लंबे समय तक उनका कोई सुराग नहीं मिलने के बाद 9 फरवरी को नीमच स्थित सीआरपीएफ कैंपस के अंदर मिले कंकाल की पहचान उनके रूप में की गई। इस खुलासे के बाद से ही मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है और कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के समय बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और परिजन मौजूद रहे, जिन्होंने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने कई रहस्यों को जन्म दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि कड़ी सुरक्षा वाले सीआरपीएफ कैंपस के भीतर एक जवान इतने दिनों तक लापता कैसे रहा और फिर उसी परिसर में उसका कंकाल कैसे मिला। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जवान के परिजनों ने शुरू से ही इस मामले में हत्या की आशंका जताई है। उनका कहना है कि नंदकिशोर का इस तरह अचानक गायब होना और बाद में कैंपस के अंदर ही मृत अवस्था में मिलना सामान्य घटना नहीं हो सकती। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
प्रशासन और पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जा रही है। फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो पाएगा।
इस घटना ने न केवल एक परिवार को गहरा आघात पहुंचाया है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजरें जांच पर टिकी हैं, ताकि इस रहस्यमयी मामले का सच सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।
