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कोटा में गांव में घुसा मगरमच्छ, समाजसेवी ने कंधे पर उठाकर किया रेस्क्यू; चंबल नदी में छोड़ा

कोटा में गांव में घुसा मगरमच्छ, समाजसेवी ने कंधे पर उठाकर किया रेस्क्यू; चंबल नदी में छोड़ा
 
कोटा में गांव में घुसा मगरमच्छ, समाजसेवी ने कंधे पर उठाकर किया रेस्क्यू; चंबल नदी में छोड़ा

राजस्थान के कोटा जिले के इटावा क्षेत्र में एक अनोखा और साहसिक रेस्क्यू देखने को मिला। चंबल नदी से निकलकर एक मगरमच्छ गांव में पहुंच गया, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई। सूचना मिलने पर समाजसेवी हयात खान मौके पर पहुंचे और अपनी सूझबूझ से मगरमच्छ का रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित वापस चंबल नदी में छोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार, इटावा क्षेत्र के एक गांव में चंबल नदी से निकलकर मगरमच्छ पहुंच गया था। गांव में मगरमच्छ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लोगों ने इसकी सूचना समाजसेवी हयात खान को दी। इसके बाद वे तुरंत मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू अभियान शुरू किया।

हयात खान ने सावधानीपूर्वक मगरमच्छ को काबू में किया और उसे गांव से बाहर सुरक्षित स्थान पर ले गए। इस दौरान उन्होंने मगरमच्छ को अपने कंधे पर उठाया। इसके बाद उसे बाइक के जरिए चंबल नदी के किनारे ले जाया गया और सुरक्षित रूप से नदी में छोड़ दिया गया।

इस पूरे रेस्क्यू का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा में है। वीडियो में समाजसेवी को मगरमच्छ को उठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। लोग उनके साहस और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता की सराहना कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के मौसम में अक्सर चंबल नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण मगरमच्छ और अन्य जलीय जीव नदी से निकलकर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होती है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, मगरमच्छ को पकड़ना बेहद जोखिम भरा काम होता है। इसे प्रशिक्षित लोगों और उचित सुरक्षा उपायों के साथ ही रेस्क्यू किया जाना चाहिए। हालांकि, इस मामले में समय रहते मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया, जिससे किसी तरह की अनहोनी नहीं हुई।

ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और समाजसेवी हयात खान के प्रयास की प्रशंसा की। उनका कहना है कि यदि समय पर मदद नहीं मिलती तो गांव में रहने वाले लोगों और पशुओं के लिए खतरा बढ़ सकता था।

फिलहाल मगरमच्छ को वापस चंबल नदी में छोड़ दिया गया है और गांव के लोगों ने राहत महसूस की है। घटना ने एक बार फिर इंसानों और वन्यजीवों के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को सामने ला दिया है।