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राजस्थान में पंचायत चुनाव पर संकट गहराया! OBC आरक्षण रिपोर्ट अटकी, वीडियो में जाने 31 जुलाई तक चुनाव कराने की चुनौती

राजस्थान में पंचायत चुनाव पर संकट गहराया! OBC आरक्षण रिपोर्ट अटकी, वीडियो में जाने 31 जुलाई तक चुनाव कराने की चुनौती
 
राजस्थान में पंचायत चुनाव पर संकट गहराया! OBC आरक्षण रिपोर्ट अटकी, वीडियो में जाने 31 जुलाई तक चुनाव कराने की चुनौती

राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण तय करने के लिए गठित राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने साफ कहा है कि राज्य सरकार की ओर से जरूरी आंकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। ऐसे में आयोग फिलहाल अपनी रिपोर्ट सौंपने की स्थिति में नहीं है। वहीं, हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियों के बीच ओबीसी आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर उलझता नजर आ रहा है। ओबीसी आरक्षण का निर्धारण करने के लिए गठित राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने स्पष्ट किया है कि सरकार से मांगी गई आवश्यक जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में आयोग आरक्षण संबंधी अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करने में असमर्थ है।

आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण आंकड़े और सूचनाएं मांगी गई थीं, लेकिन अभी तक उनका जवाब नहीं मिला है। बिना इन आंकड़ों के आयोग वैज्ञानिक और कानूनी आधार पर आरक्षण का निर्धारण नहीं कर सकता।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने उसे 20 जून तक रिपोर्ट सौंपने के लिए बाध्य नहीं किया था। अधिकारियों के मुताबिक आयोग का कार्यकाल 30 दिसंबर तक निर्धारित है और वह निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही अपना कार्य पूरा करेगा।

दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने भी इस मामले में चिंता जताई है। आयोग ने 15 जून को राज्य सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि पंचायत और निकाय चुनावों की तारीख नजदीक है, इसलिए ओबीसी आरक्षण से संबंधित आवश्यक डेटा जल्द उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, आयोग के अनुसार राज्य सरकार की ओर से अब तक इस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला है।

इस बीच, राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों के तहत राज्य सरकार को 31 जुलाई तक पंचायत चुनाव कराने हैं। ऐसे में आरक्षण निर्धारण में हो रही देरी चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित कर सकती है। चुनाव विशेषज्ञों का मानना है कि ओबीसी आरक्षण का मुद्दा सुलझे बिना चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाना कानूनी रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

जानकारों का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग एक बार फिर उसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां आरक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी हुए बिना चुनाव कराना संभव नहीं दिख रहा। यदि समय रहते सरकार आवश्यक आंकड़े उपलब्ध नहीं कराती है तो चुनाव कार्यक्रम प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।

ओबीसी आरक्षण का मुद्दा पहले भी कई राज्यों में चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर चुका है। सर्वोच्च न्यायालय ने भी स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए 'ट्रिपल टेस्ट' प्रक्रिया पूरी करने पर जोर दिया है। इसी प्रक्रिया के तहत आयोग को सामाजिक और सांख्यिकीय अध्ययन के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होती है।

फिलहाल सभी की नजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यदि सरकार जल्द आवश्यक आंकड़े आयोग को उपलब्ध कराती है तो आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अन्यथा पंचायत और निकाय चुनावों के तय समय पर होने को लेकर संशय बना रह सकता है। आने वाले कुछ सप्ताह राजस्थान की चुनावी तैयारियों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।