नाबालिग को शादी की नियत से भगाने के मामले में 10 साल की सजा, कोर्ट का फैसला
करीब सात वर्ष पहले नाबालिग लड़की को शादी की नियत से बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद यह फैसला सुनाया।
मामले के अनुसार, पीड़िता के परिजन ने 7 जनवरी 2019 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। शिकायत में बताया गया था कि वह अपने परिवार के साथ एक नलकूप पर काश्त का कार्य करता है और वहीं परिवार के साथ रहता है। इसी दौरान उसकी नाबालिग बेटी को एक युवक बहला-फुसलाकर शादी की नियत से अपने साथ भगा ले गया।
परिजनों ने जब लड़की को आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश किया तो उसका कहीं पता नहीं चला। बाद में उन्हें संदेह हुआ कि एक युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया है। इसके बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर लिया और आरोपी को गिरफ्तार किया। इसके बाद मामले की पूरी जांच कर पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र पेश किया।
सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष ने विभिन्न साक्ष्य और गवाह पेश किए। गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। इसके बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिगों को बहला-फुसलाकर ले जाने जैसे अपराध गंभीर हैं और ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों पर रोक लगाई जा सके।
फैसले के बाद पीड़िता के परिजनों ने संतोष जताया और कहा कि उन्हें न्याय मिला है। वहीं इस मामले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अदालत का यह फैसला समाज में एक सख्त संदेश देता है कि नाबालिगों से जुड़े अपराधों में दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
