नए जिलों में सीईओ पद को लेकर विवाद: RAS एसोसिएशन ने जताई आपत्ति, कैडर संरचना पर असर की चेतावनी
राजस्थान में नए जिलों की प्रशासनिक संरचना को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) एसोसिएशन ने राज्य सरकार के उस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है, जिसमें नए जिलों में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद को राजस्थान ग्रामीण विकास राज्य सेवा के तहत सृजित करने की बात कही गई है।
RAS एसोसिएशन का कहना है कि इस तरह के निर्णय से राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के पदोन्नति के अवसर सीमित हो सकते हैं। संगठन का मानना है कि सीईओ जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों को दूसरी सेवा के तहत रखने से RAS कैडर की भूमिका और अधिकार क्षेत्र पर असर पड़ेगा।
एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने दावा किया है कि यह निर्णय प्रशासनिक ढांचे में असंतुलन पैदा कर सकता है और लंबे समय में कैडर संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। उनका कहना है कि जिला स्तर पर महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्तियों में संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि सभी सेवाओं को समान अवसर मिल सकें।
प्रशासनिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए जिलों के गठन के बाद प्रशासनिक पदों का पुनर्गठन एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इसमें विभिन्न सेवाओं के हितों का संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार नए जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अलग-अलग कैडर के अधिकारियों को जिम्मेदारी देने पर विचार कर रही है, ताकि विकास कार्यों और ग्रामीण योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
वहीं RAS एसोसिएशन ने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है और कहा है कि पदोन्नति व्यवस्था और कैडर हितों को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम निर्णय लिया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, नए जिलों में सीईओ पद की नियुक्ति को लेकर उठे इस विवाद ने राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था में नई बहस को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।
