कोटा में BJP के नए जिला कार्यालय पर विवाद: फुटेज में देंखे रेलवे ने बताया अपनी जमीन पर अवैध निर्माण, KDA से मांगी कार्रवाई
राजस्थान के कोटा शहर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए जिला कार्यालय के निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। पश्चिम मध्य रेलवे ने 80 फीट रोड पर करीब 3 हजार वर्गमीटर भूमि पर हो रहे निर्माण को रेलवे की जमीन पर अवैध निर्माण बताया है। रेलवे ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं और कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) से भी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है। रेलवे के इस कदम के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
रेलवे ने 16 जून को जारी किया था पत्र
जानकारी के अनुसार, पश्चिम मध्य रेलवे के वरिष्ठ मंडल अभियंता (दक्षिण) ने 16 जून को सहायक मंडल अभियंता (रामगंजमंडी) को पत्र लिखकर मामले में कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए थे।इसके साथ ही रेलवे ने कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) को भी पत्र भेजकर लीज की शर्तों के अनुसार उचित कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
सड़क निर्माण के लिए दी गई थी जमीन
रेलवे का दावा है कि संबंधित भूमि 10 जुलाई 2008 को तत्कालीन शहरी सुधार न्यास (UIT), जो अब KDA है, को 35 वर्ष की लीज पर केवल सड़क निर्माण के उद्देश्य से दी गई थी।लीज समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि इस भूमि का उपयोग किसी भी व्यावसायिक या अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता। रेलवे का आरोप है कि इन शर्तों के बावजूद उसी जमीन पर भाजपा का जिला कार्यालय बनाया जा रहा है।
2020 में भाजपा को किया गया था आवंटन
रेलवे के अनुसार, वर्ष 2020 में तत्कालीन यूआईटी/KDA ने इसी भूमि का आवंटन भाजपा को कर दिया। रेलवे का कहना है कि यह फैसला लीज की मूल शर्तों के विपरीत है।रेलवे रिकॉर्ड के मुताबिक, संबंधित भूमि की चौड़ाई 182.88 मीटर दर्ज है और यह सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित थी।
रेलवे अधिकारी बोले- सार्वजनिक हित की जमीन का बदला उपयोग
सहायक मंडल अभियंता (रामगंजमंडी) पुंडरिक चंद्र ने कहा कि यह जमीन सार्वजनिक हित, विशेष रूप से सड़क निर्माण के लिए लीज पर दी गई थी। वर्तमान में हो रहा निर्माण लीज की शर्तों के अनुरूप नहीं है।उन्होंने कहा कि मामले में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
KDA और भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल इस मामले में कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) और भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में दोनों पक्षों का पक्ष स्पष्ट होने के बाद मामले की स्थिति और साफ हो सकेगी।यदि रेलवे के दावों के आधार पर जांच में लीज की शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो निर्माण कार्य और भूमि आवंटन को लेकर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।
