मौनी अमावस्या स्नान विवाद में बढ़ा टकराव, वायरल वीडियो में देंखे शंकराचार्य पदवी तक पहुंचा मामला
प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर स्नान व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चला आ रहा यह टकराव अब सीधे शंकराचार्य की पदवी तक पहुंच गया है। प्रशासन की ओर से भेजे गए नोटिस के जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 24 घंटे के भीतर मेला प्रशासन को 8 पेजों का विस्तृत जवाब ई-मेल के माध्यम से भेजा है, जिसमें नोटिस को पूरी तरह मनमाना, दुर्भावनापूर्ण और असंवैधानिक बताया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने जवाब में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मेला प्रशासन द्वारा जारी किया गया नोटिस न तो संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है और न ही इसका कोई कानूनी आधार है। उन्होंने कहा कि उन्हें शंकराचार्य पद पर बने रहने से रोकने संबंधी कोई भी आदेश अब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से जारी नहीं किया गया है। ऐसे में प्रशासन का यह कदम न केवल अधिकार क्षेत्र से बाहर है, बल्कि धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने जैसा भी है।
अपने जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी उल्लेख किया है कि शंकराचार्य पद से जुड़े मामले फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन हैं। जब कोई मामला कोर्ट में लंबित हो, तब किसी भी तीसरे पक्ष को उस पर टिप्पणी करने, निर्णय देने या किसी प्रकार की रोक लगाने का कोई अधिकार नहीं होता। उन्होंने कहा कि मेला प्रशासन इस तथ्य को नजरअंदाज कर रहा है और बिना कानूनी आधार के दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि यह नोटिस तत्काल वापस नहीं लिया गया, तो वे कानूनी रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में मेला प्रशासन के खिलाफ मानहानि का दावा दायर किया जाएगा। उनके अनुसार, इस तरह के नोटिस से न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, बल्कि शंकराचार्य पद जैसी गरिमामयी धार्मिक परंपरा को भी विवादों में घसीटा जा रहा है।
गौरतलब है कि मौनी अमावस्या पर स्नान को लेकर प्रयागराज में पहले से ही प्रशासन और साधु-संतों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन सख्ती बरत रहा है, जबकि कुछ संत संगठन इसे धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं। इसी क्रम में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद सामने आया, जो अब और गहरा होता जा रहा है।
फिलहाल मेला प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि भेजे गए जवाब का कानूनी अध्ययन किया जा रहा है और आगे की कार्रवाई उसी के आधार पर तय की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रयागराज के माघ मेला क्षेत्र में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस नोटिस को वापस लेता है या मामला अदालत तक और आगे बढ़ता है।
