शहीद कैप्टन फैज मोहम्मद के स्मारक को लेकर हुआ विवाद, उपवास पर बैठीं वीरांगना जैतून बानो
1965 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए कैप्टन फैज़ मोहम्मद के स्मारक बनाने को लेकर झुंझुनू जिले में विवाद गहराता जा रहा है। शहीद की विधवा ज़ैतून बानो ने झुंझुनू में शहीद स्मारक के सामने अनशन शुरू कर दिया है। समाज के सभी वर्गों के लोग भी इस विरोध में शामिल हो गए हैं। मामला सूरजगढ़ सबडिवीजन के बनवास गांव का है, जहां शहीद का परिवार और प्रशासन मूर्ति लगाने के लिए प्रस्तावित जमीन के मालिकाना हक को लेकर आमने-सामने हैं।
विवाद की जड़ वह जमीन है जिस पर शहीद का परिवार स्मारक बनाना चाहता है। शहीद के परिवार और उनके समर्थकों का दावा है कि यह जमीन उनकी पुश्तैनी और लीज पर ली गई जमीन है। यह विवाद हाल ही में प्रशासन द्वारा उक्त जमीन पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर हुआ था। शहीद का परिवार जहां इसे अपनी पुश्तैनी जमीन बताता है, वहीं प्रशासन का कहना है कि यह ग्राम पंचायत की है।
फैज़ मोहम्मद 18वीं कैवलरी यूनिट के एक बहादुर ऑफिसर थे। शहीद कैप्टन फैज मोहम्मद 18वीं कैवलरी यूनिट के एक बहादुर ऑफिसर थे। उनकी शहादत को श्रद्धांजलि देने के लिए उसी यूनिट के पूर्व लेफ्टिनेंट कैप्टन एजाज नबी और सूबेदार मोहम्मद रफीक खान खास तौर पर झुंझुनू गए थे। सूबेदार मोहम्मद रफीक खान यूनिट की तरफ से एक ऑफिशियल लेटर लेकर डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर से भी मिले। पूर्व सैनिक भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मौजूद डॉक्यूमेंट्स शहीद के परिवार के पक्ष में हैं और एडमिनिस्ट्रेशन को शहीद के सम्मान में दखल नहीं देना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व वर्किंग प्रेसिडेंट खलील बुडाना भी विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंचे और एडमिनिस्ट्रेशन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जमीन शहीद की पुश्तैनी प्रॉपर्टी है और उस पर मेमोरियल बनाना उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंचार्ज मिनिस्टर के कलेक्टर से रिपोर्ट मांगने और शहीद के मामले की सुनवाई करने के निर्देशों के बावजूद लोकल एडमिनिस्ट्रेशन अड़ियल रवैया दिखा रहा है। इस बारे में एडमिनिस्ट्रेशन ने क्या कहा? दूसरी तरफ, सूरजगढ़ SDM दीपक चंदन ने एडमिनिस्ट्रेशन का बचाव करते हुए कहा कि जो एक्शन लिया गया वह पूरी तरह से नियमों के मुताबिक था। उन्होंने साफ किया कि ग्राम पंचायत ने अपनी पंचायती ज़मीन से कब्ज़ा हटा दिया है और सरकारी ज़मीन पर कोई भी गैर-कानूनी कब्ज़ा मंज़ूर नहीं है। वहीं, बहादुर महिला ज़ैतून बानो ने साफ कहा है कि उनका संघर्ष और अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक शहीद कैप्टन फैज़ मोहम्मद की मूर्ति लगाने का रास्ता साफ नहीं हो जाता।
