कुंभलगढ़ दुर्ग में विवाद: 200 साल पुरानी रियासतकालीन जेल को शौचालय में बदलने पर मचा हंगामा
कुंभलगढ़ दुर्ग से इतिहास और संरक्षण को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। विश्व धरोहर स्थल की तलहटी में स्थित करीब 200 वर्ष पुरानी रियासतकालीन जेल की बैरकों को अब महिला और पुरुष शौचालय में परिवर्तित कर दिया गया है। स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि यह कदम विरासत संरक्षण के मानकों के खिलाफ है और इससे ऐतिहासिक धरोहर की मूल पहचान को नुकसान पहुंच सकता है। कई लोगों ने इसे ऐतिहासिक संरचना के साथ छेड़छाड़ बताते हुए आपत्ति जताई है।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पर्यटकों की सुविधा और बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है, ताकि दुर्ग परिसर में स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर किया जा सके। उनका कहना है कि उपलब्ध स्थान का उपयोग व्यावहारिक जरूरतों के आधार पर किया गया है।इस पूरे मामले ने अब एक बहस को जन्म दे दिया है—एक तरफ पर्यटन और सुविधा प्रबंधन है, तो दूसरी तरफ ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विरासत स्थल पर बदलाव करते समय संतुलन और संरक्षण मानकों का पालन बेहद जरूरी है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण जैसे संरक्षण निकायों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कि क्या इस बदलाव से पहले उचित मंजूरी और वैकल्पिक योजना पर विचार किया गया था या नहीं।फिलहाल यह मामला चर्चा में है और आगे प्रशासनिक स्तर पर इस पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
