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नागौर जिले के जायल में कांस्टेबल ने SHO पर हमला किया, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें पुलिस महकमे में सनसनी

नागौर जिले के जायल में कांस्टेबल ने SHO पर हमला किया, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें पुलिस महकमे में सनसनी
 
नागौर जिले के जायल में कांस्टेबल ने SHO पर हमला किया, एक्सक्लुसीव फुटेज में जानें पुलिस महकमे में सनसनी

जिले के जायल थाना परिसर में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है जिसमें वहां तैनात एक पुलिस कांस्टेबल ने अपने ही थाना अधिकारियों पर हमला कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब आरोपी कांस्टेबल शराब के नशे में था और उसने अपने वरिष्ठ अधिकारी को निशाना बनाया।

पुलिस के अनुसार, जायल थाने में कार्यरत कांस्टेबल रणजीत ताडा ने शराब के नशे में थानाधिकारी मुकेश कुमार वर्मा के क्वार्टर का गेट तोड़कर भीतर प्रवेश किया और नुकीले हथियार से उन पर हमला कर दिया। इस हमले से SHO (थानाधिकारी) को खरोंचें और मामूली चोटें आईं, जिन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

घटना रात करीब 1 बजे की बताई जा रही है, जब शांति-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर सबसे ज़िम्मेदार विभाग की ही बहनगदी हो गई। स्थानीय पुलिस ने बताया कि आरोपी कांस्टेबल उस समय शराब के नशे में था, जिसके कारण उसने यह हिंसक कृत्य किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए FIR दर्ज कर पूरी जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आरोपी कांस्टेबल फिलहाल फरार है और उसकी तलाश जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के आदेश पर जल्द उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है। इसके अलावा मामले की गहनता से समीक्षा करते हुए विभागीय कार्रवाइयाँ भी चल रही हैं।

पुलिस महकमे के भीतर ही एक पुलिसकर्मी द्वारा हमला किये जाने की यह घटना स्थानीय जनता और पुलिस प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इससे पहले भी राजस्थान में पुलिस जवानों के असमय व्यवहार और डाडागिरी के आरोप समय-समय पर सुनने को मिले हैं, लेकिन ऐसा मामला एक वरिष्ठ अधिकारी को निशाना बनाकर वार करने का इस साल का एक अलग ही मामला माना जा रहा है।

इस प्रकार की घटनाएँ न केवल पुलिस गठन की सामूहिक छवि को प्रभावित करती हैं, बल्कि आम नागरिकों के मन में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करती हैं। वरिष्ठ अधिकारीयों द्वारा जल्द से जल्द आरोपी कांस्टेबल की गिरफ्तारी और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही जा रही है।

जायल थानाधिकारी के परिवार और पुलिस विभाग को राहत इसलिए मिली कि हमला गंभीर नहीं था और SHO को गंभीर चोटें नहीं आईं, लेकिन यह घटना यह भी दर्शाती है कि पुलिस कर्मचारियों के बीच अनुशासन और निगरानी पर और अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है।

अब पुलिस इस मामले को एक गंभीर अपराध के रूप में देख रही है और फरार आरोपी के खिलाफ वे आरोपों के साथ ही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी उठा सकती है। आगाह किया गया है कि ऐसी परिस्थितियाँ दोबारा न उत्पन्न हों इसके लिए विभाग में सख़्त निर्देश और निगरानी बढ़ाई जाएगी।