कांग्रेस ने मोदी का चाय बेचते पोस्ट किया AI वीडियो, फुटेज में जानें पीएम को चायवाले के रूप में दिखाकर छेडा राजनीतिक विवाद
बुधवार को Indian National Congress (कांग्रेस) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक एआई जनरेटेड वीडियो पोस्ट कर के राजनीतिक हलचल मचा दी है। इस वीडियो में नरेंद्र मोदी को चाय बेचते हुए दिखाया गया है — हाथ में चाय की केतली और ग्लास लिए, और जोर-जोर से “चाय बोलो, चाय-चाय चाहिए” बोलते हुए।
वीडियो में मोदी लाल कारपेट पर चलते दिख रहे हैं और पीछे भारत समेत कई देशों के झंडे दिखाई दे रहे हैं, जिनमें Bharatiya Janata Party (भाजपा) का झंडा भी शामिल है। इस प्रस्तुति ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है।
यह वीडियो कांग्रेस प्रवक्ता डॉ रागिनी नायक द्वारा पोस्ट किया गया। उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा — “अब ई कौन किया बे।” इस तरह का व्यंग्यात्मक खेल कांग्रेस ने बदलते राजनीतिक माहौल और भाजपा सरकार पर कटाक्ष के रूप में पेश किया है।
लेकिन इस वीडियो ने भाजपा नेताओं और समर्थकों की तीखी प्रतिक्रिया भी उत्पन्न की। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इसे “शर्मनाक” बताया। उन्होंने अपने X-पोस्ट में लिखा कि “नामदार कांग्रेस ओबीसी समुदाय से आने वाले कामदार प्रधानमंत्री को बर्दाश्त नहीं कर सकती। जनता उन्हें कभी माफ नहीं करेगी।” पूनावाला ने साफ़ संकेत दिया कि वे इसे समाज के एक बड़े वर्ग — विशेषकर ओबीसी समुदाय — का अपमान मानते हैं, और इसे चुनावी राजनीति में जातीय-संवेदनशील विषय बनाने की कोशिश बताया है।
राजनीतिक गलियारों में इस वीडियो को लेकर दो तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। एक ओर, कांग्रेस इसे सरकार की नीतियों और प्रधानमंत्री की जन-छवि को व्यंग्यात्मक रूप से चुनौती देने का साधन बता रही है। वहीं दूसरी ओर, भाजपा और उसके समर्थक इसे “संस्था और प्रधानमंत्री की गरिमा को ठेस पहुँचाने” वाला प्रयास मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी बहस तेज है। कुछ उपयोगकर्ता इसे हास्य या व्यंग्य के तौर पर देख रहे हैं, तो कई लोग इसे असम्मानजनक और अपमानजनक बता रहे हैं। राजनीतिक टिप्पणीकारों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक मजाक या व्यंग्य नहीं है, बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक संवेदनाओं और जातीय-धार्मिक पहचान के बारे में विवाद खड़ा करने का माध्यम भी बन सकता है।
विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह का एआई-जनित वीडियो भविष्य में राजनीतिक प्रचार का एक नया हथियार बन सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर फैले व्यंग्यात्मक या कार्टून-शैली के कंटेंट से आम जनता को मजाक में तो कुछ दिखाई दे सकता है, लेकिन सामाजिक असहमति और राजनैतिक ध्रुवीकरण को भी बढ़ावा मिल सकता है।
कांग्रेस और भाजपा दोनों नेताओं की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि यह मामूली मजाक नहीं, बल्कि रणनीतिक राजनैतिक हमला/प्रतिक्रिया है। आगे देखा जाना है कि इस विवाद का राजनीतिक असर अगले कुछ दिनों में किस रूप में सामने आता है — क्या यह केवल सोशल मीडिया संघर्ष ही रहेगा, या चुनावी बहसों, प्रेस कॉन्फ्रेंसों और जनसभा तक भी पहुँचेगा।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि डिजिटल मीडिया और एआई युग में राजनीतिक संवाद, व्यंग्य और वायरल कंटेंट कितनी तेजी से सार्वजनिक राय और संवेदनाओं को प्रभावित कर सकते हैं — और साथ ही, किस हद तक राजनीतिक दल वर्तमान तकनीकों का इस्तेमाल अपने हित में करते हैं।
