राजस्थान में वाणिज्यिक कर विभाग की बड़ी कार्रवाई, फुटेज में जाने 8 प्रतिष्ठानों का सर्वे; 1.43 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा
राजस्थान में वाणिज्यिक कर विभाग ने टैक्स चोरी और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़ी संभावित अनियमितताओं के खिलाफ कार्रवाई करते हुए प्रदेशभर में 8 कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों का सर्वे किया। विभाग ने 13 और 14 अक्टूबर को किराना, निर्माण, मार्बल, हार्डवेयर और लुब्रिकेंट कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच की। इस दौरान विभिन्न मामलों में कुल 1 करोड़ 43 लाख 67 हजार रुपये से अधिक की राशि जमा कराने और इनपुट टैक्स क्रेडिट रिवर्स कराने की कार्रवाई की गई। जांच में कारोबार छिपाने, बिक्री के अनुपात में कम टैक्स जमा कराने और गलत तरीके से ITC का लाभ लेने जैसी संभावित अनियमितताएं सामने आई हैं।
13 और 14 अक्टूबर को 8 प्रतिष्ठानों पर सर्वे
वाणिज्यिक कर विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के लिए सर्वे अभियान चलाया। इसके तहत किराना, निर्माण सामग्री, मार्बल, हार्डवेयर और लुब्रिकेंट कारोबार से जुड़े कुल 8 कॉमर्शियल प्रतिष्ठानों को जांच के दायरे में लिया गया।विभाग की कार्रवाई के दौरान कारोबारियों के खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, टैक्स विवरणियों और अन्य लेखा अभिलेखों की पड़ताल की गई। जांच का उद्देश्य कारोबार के वास्तविक टर्नओवर और जमा कराए गए टैक्स के बीच अंतर का पता लगाना था।कार्रवाई के दौरान विभिन्न मामलों में 1 करोड़ 43 लाख 67 हजार रुपये से अधिक की राशि जमा कराने और ITC रिवर्स कराने की प्रक्रिया अपनाई गई।
टैक्स चोरी और गलत ITC क्लेम की आशंका
सर्वे के दौरान विभाग को कई तरह की संभावित कर अनियमितताओं के संकेत मिले। इनमें वास्तविक कारोबार छिपाना, बिक्री के अनुपात में कम टैक्स जमा कराना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लेना और टैक्स रिटर्न में दर्ज आंकड़ों के बीच अंतर जैसी बातें शामिल हैं।इसके अलावा, कुछ मामलों में अनिवार्य ई-इनवॉइस जारी नहीं करने की आशंका भी सामने आई है। ई-इनवॉइस व्यवस्था के तहत निर्धारित कारोबारियों को नियमों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक इनवॉइस जारी करना होता है।विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों के स्टॉक, खरीद-बिक्री के बिल और लेखा अभिलेखों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इन दस्तावेजों के मिलान के बाद ही संभावित कर देनदारी और अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
जयपुर की फर्म ने 99.76 लाख रुपये की ITC की रिवर्स
कार्रवाई के दौरान जयपुर के सी-स्कीम स्थित मैसर्स एजीआरएस वेंचर्स एलएलपी के मामले की भी जांच की गई। विभाग ने फर्म के खिलाफ अचल संपत्ति निर्माण से संबंधित इनपुट टैक्स क्रेडिट के इस्तेमाल की पड़ताल की।इस कार्रवाई के दौरान फर्म ने 99.76 लाख रुपये की ITC स्वेच्छा से रिवर्स की। इनपुट टैक्स क्रेडिट वह कर लाभ है, जिसके तहत पात्र कारोबारी खरीद पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट लेकर अपनी टैक्स देनदारी समायोजित कर सकते हैं। हालांकि, इसका लाभ निर्धारित कानूनी शर्तों के अनुसार ही लिया जा सकता है।अचल संपत्ति निर्माण से जुड़े खर्चों पर ITC की पात्रता संबंधित वस्तुओं, सेवाओं और लागू कर प्रावधानों पर निर्भर करती है। ऐसे मामलों में विभाग दस्तावेजों और लेन-देन की प्रकृति के आधार पर जांच करता है।
खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड खंगाल रहा विभाग
वाणिज्यिक कर विभाग ने सर्वे के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के स्टॉक और लेखा रिकॉर्ड की जांच आगे बढ़ा दी है। खरीद-बिक्री के बिलों, टैक्स रिटर्न और वास्तविक कारोबार के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा, ताकि किसी भी संभावित गड़बड़ी की पुष्टि की जा सके।इस कार्रवाई में 1.43 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराने और ITC रिवर्स कराने की प्रक्रिया सामने आई है। वहीं, आगे की जांच के आधार पर अन्य कर देनदारियों का भी आकलन किया जा सकता है।फिलहाल, विभाग की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच में सामने आने वाले दस्तावेजों और संबंधित कर प्रावधानों के आधार पर तय होंगे।
