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सीकर में बच्चे की मौत पर CMHO ने सिरप से संबंधित दावे को खारिज किया, वीडियो में जाने पूरा मामला

सीकर में बच्चे की मौत पर CMHO ने सिरप से संबंधित दावे को खारिज किया, वीडियो में जाने पूरा मामला
 
सीकर में बच्चे की मौत पर CMHO ने सिरप से संबंधित दावे को खारिज किया, वीडियो में जाने पूरा मामला

जिले में 7 वर्षीय बच्चे की मौत को लेकर सामने आए निःशुल्क दवा योजना के सिरप से जुड़ी आशंकाओं को सीएमएचओ सीकर ने खारिज कर दिया है। सरकारी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि जिस बैच की दवा का आरोप लगाया गया था, वह झुंझुनूं जिले में सप्लाई की गई थी, न कि सीकर में, जहां मृतक बच्चे को दवा दी गई थी।

जानकारी के अनुसार, 28 सितंबर को सीकर में नितियांस शर्मा नामक 7 वर्षीय बालक की मौत हो गई थी। प्रारंभिक रिपोर्ट और परिजनों की आशंका थी कि बच्चे की मौत डेक्सट्रोमेथारपन सिरप की ओवरडोज से हुई। इस दवा का इस्तेमाल सरकार की मुख्यमंत्री निःशुल्क दवा योजना के तहत किया गया था। परिजनों ने मीडिया और अधिकारियों को बताया कि दवा लेने के तुरंत बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गई।

घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की तत्काल जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि जिस बैच की दवा पर सवाल उठाया गया था, वह सीकर जिले में सप्लाई नहीं हुई थी। सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि निःशुल्क दवा योजना में वितरण और रिकॉर्ड पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से किया जाता है और दवा की क्वालिटी नियंत्रित मानकों के अनुसार सुनिश्चित की जाती है।

सीएमएचओ ने कहा कि बच्चों की मौत के मामलों में दवा की गुणवत्ता और वितरण प्रक्रिया की जांच अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि जांच में यह पुष्टि हुई कि मृतक बच्चे को दी गई दवा का बैच सुरक्षित और मानक अनुरूप था। इस तथ्य के आधार पर, स्वास्थ्य विभाग ने सिरप से मौत होने की आशंका को खारिज किया।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, डेक्सट्रोमेथारपन सिरप का सुरक्षित और निर्धारित मात्रा में सेवन करने पर सामान्यत: कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ता। किसी भी दवा के ओवरडोज या अनियमित इस्तेमाल के मामले में ही स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। विभाग ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी दवा का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह और निर्धारित मात्रा में ही करें।

परिजनों के दुख और आशंका को देखते हुए सरकार ने भी मामले की गहन जांच का आदेश दिया। सीएमएचओ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा प्राथमिकता है और भविष्य में दवा वितरण और निगरानी को और अधिक सुदृढ़ बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।

इस घटना ने जिले में निःशुल्क दवा योजना के प्रति जागरूकता और सावधानी पर भी जोर दिया है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि इस तरह की अफवाहें और गलत धारणाएं जनता में भ्रम पैदा कर सकती हैं। इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे केवल सरकारी सूचना और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर भरोसा करें।

इस प्रकार, सीकर में हुए इस दुखद मामले में सरकारी जांच ने स्पष्ट कर दिया है कि मृतक बच्चे की मौत सिरप के कारण नहीं हुई। स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की अफवाहों से बचा जा सके और निःशुल्क दवा योजना सुचारू रूप से जारी रह सके।