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City of a Hundred Islands: क्यों कहा जाता है बांसवाड़ा को टापुओं का शहर, वीडियो में जानें इसके अनकहे इतिहास और खूबसूरती की कहानी

City of a Hundred Islands: क्यों कहा जाता है बांसवाड़ा को टापुओं का शहर, वीडियो में जानें इसके अनकहे इतिहास और खूबसूरती की कहानी
 
City of a Hundred Islands: क्यों कहा जाता है बांसवाड़ा को टापुओं का शहर, वीडियो में जानें इसके अनकहे इतिहास और खूबसूरती की कहानी

राजस्थान को लोग रेगिस्तानी प्रदेश के रूप में जानते हैं। यहां की रेत की लहरें, किले, हवेलियां और गर्म हवाओं से भरा माहौल लोगों के जेहन में बसता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी राजस्थान की गोद में एक ऐसी जगह भी है, जहां पानी की भरपूर मौजूदगी है और जिसे “टापुओं का शहर” यानी City of a Hundred Islands कहा जाता है। यह शहर है बांसवाड़ा, जो दक्षिणी राजस्थान में बसा हुआ है और अपनी अनूठी पहचान के कारण हमेशा आकर्षण का केंद्र बना रहता है।


बांसवाड़ा को क्यों कहा जाता है टापुओं का शहर?

बांसवाड़ा को "टापुओं का शहर" इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां माही नदी और उसके बांधों के चलते कई झीलें और जलाशय बने हुए हैं। इन जलाशयों में पानी के बीच छोटे-छोटे टापू उभर आते हैं, जिनकी संख्या सौ से भी अधिक बताई जाती है। यही वजह है कि बांसवाड़ा को “सिटी ऑफ हंड्रेड आइलैंड्स” नाम दिया गया है। जब बारिश के मौसम में ये जलाशय लबालब भर जाते हैं तो नजारा इतना अद्भुत हो जाता है कि यह किसी कश्मीर की झील जैसा प्रतीत होता है।

माही नदी और माही बांध का महत्व

बांसवाड़ा की खूबसूरती का सबसे बड़ा कारण है माही नदी, जो मध्य प्रदेश से निकलकर राजस्थान में प्रवेश करती है। इस नदी पर बना माही बजाज सागर बांध यहां की जीवनरेखा है। यह न सिर्फ बिजली और सिंचाई का स्रोत है बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। बांध के विशाल जलाशय में बने छोटे-छोटे टापू दूर से देखने पर मानो किसी समंदर में बिखरे द्वीप जैसे नजर आते हैं।

इतिहास की गहराइयों में बांसवाड़ा

बांसवाड़ा का इतिहास भी उतना ही रोचक है जितना इसका भौगोलिक स्वरूप। कहा जाता है कि बांसवाड़ा का नाम यहां के बांस के घने जंगलों से पड़ा। पुरानी मान्यताओं के अनुसार यह क्षेत्र वागड़ अंचल का हिस्सा रहा है और यहां पर भील समुदाय की प्रमुखता रही। भीलों की परंपराएं और उनका लोकजीवन आज भी इस जिले की संस्कृति में रचा-बसा है।राजपूत शासकों के दौर में बांसवाड़ा ने कई ऐतिहासिक घटनाओं को देखा। किलों और महलों के अवशेष यहां की शौर्य गाथाओं की गवाही देते हैं। खासकर गोपीनाथ का किला, अरथुना के मंदिर और मदनेश्वर महादेव जैसे स्थल इसके ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाते हैं।

प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन स्थल

बांसवाड़ा की सुंदरता सिर्फ टापुओं तक ही सीमित नहीं है। यहां के कई पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर खींचते हैं।
कागदी पिकअप वियर – यह जलाशय पिकनिक और घूमने-फिरने के लिए बेहद मशहूर है।
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर – शक्ति उपासकों के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जिसे त्रिपुरा सुंदरी माता का श्रीयंत्र मंदिर भी कहा जाता है।
अरथुना मंदिर – प्राचीन खंडहर और ऐतिहासिक मंदिर यहां की पुरातनता का प्रमाण देते हैं
माही बांध का व्यू प्वॉइंट – जहां से सैकड़ों टापुओं का नजारा बेहद मनमोहक लगता है।
इसके अलावा मानसून के दौरान यहां की हरियाली और झरने लोगों को प्रकृति की गोद में खींच ले जाते हैं।

संस्कृति और लोकजीवन

बांसवाड़ा की संस्कृति आदिवासी परंपराओं से जुड़ी हुई है। यहां का लोकनृत्य, संगीत और तीज-त्योहार अनूठे हैं। गवरी नृत्य, जो भगवान शिव और पार्वती की कथाओं पर आधारित है, इस क्षेत्र की विशेष पहचान है। यहां के भील समुदाय के लोग अपने लोकगीतों और नृत्यों से त्योहारों को खास बनाते हैं।

क्यों है यह जगह खास?

राजस्थान को सिर्फ रेगिस्तान और शुष्क भूमि से जोड़कर देखना अधूरा होगा, क्योंकि बांसवाड़ा इस छवि को तोड़ता है। यहां की नदियां, झीलें और टापू राजस्थान की विविधता और प्राकृतिक धरोहर का प्रतीक हैं। यही वजह है कि बांसवाड़ा को राजस्थान का “चेरापूंजी” भी कहा जाता है, क्योंकि यहां सबसे ज्यादा बारिश होती है।

पर्यटन की संभावना

अगर पर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो बांसवाड़ा में अपार संभावनाएं हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन भी यहां की खूबसूरती को देश-दुनिया तक पहुंचाने के प्रयास कर रहे हैं। जलक्रीड़ा, बोटिंग और एडवेंचर गतिविधियां यहां के पर्यटन को और खास बना सकती हैं।