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दक्षिण-पूर्व एशिया में अपराधियों और आतंकियों का नया हथियार बने सस्ते ड्रोन, फुटेज में देंखे ड्रग्स तस्करी से लेकर हमलों तक में इस्तेमाल

दक्षिण-पूर्व एशिया में अपराधियों और आतंकियों का नया हथियार बने सस्ते ड्रोन, फुटेज में देंखे ड्रग्स तस्करी से लेकर हमलों तक में इस्तेमाल
 
दक्षिण-पूर्व एशिया में अपराधियों और आतंकियों का नया हथियार बने सस्ते ड्रोन, फुटेज में देंखे ड्रग्स तस्करी से लेकर हमलों तक में इस्तेमाल

दक्षिण-पूर्व एशिया में सस्ते और आसानी से उपलब्ध होने वाले ड्रोन अपराधियों और आतंकी संगठनों के लिए नया हथियार बनते जा रहे हैं। इनका इस्तेमाल ड्रग्स की तस्करी, जेलों में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने, सैन्य ठिकानों की निगरानी करने और पुलिस की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र के सात देशों में ड्रोन से जुड़ी अवैध गतिविधियों के मामले सामने आए हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त 2026 तक दर्ज किए गए ड्रोन से जुड़े मामलों में 86 प्रतिशत मामले ड्रग्स तस्करी से संबंधित थे। यह आंकड़ा दिखाता है कि अपराधी पारंपरिक तस्करी के तरीकों के साथ अब ड्रोन तकनीक का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। छोटे आकार और आसानी से उड़ाए जा सकने के कारण इनकी निगरानी करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुश्किल हो सकता है।

थाईलैंड में 4583 ड्रोन जब्त

रिपोर्ट के अनुसार, थाईलैंड में 4583 ड्रोन जब्त किए गए। यह आंकड़ा देश में ड्रोन के इस्तेमाल और उससे जुड़ी सुरक्षा चिंताओं की ओर संकेत करता है। हालांकि, जब्त किए गए सभी ड्रोन का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ था या नहीं, इसकी अलग-अलग जानकारी मामले के अनुसार देखी जानी चाहिए।ड्रोन के जरिए ड्रग्स और अन्य प्रतिबंधित सामान एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन रही हैं। जहां पारंपरिक तरीकों में तस्करों को सड़क, समुद्र या अन्य परिवहन मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है, वहीं ड्रोन से कुछ दूरी तक सामान सीधे पहुंचाने की कोशिश की जा सकती है।

मलेशिया की जेलों में ड्रोन से पहुंचाए गए ड्रग्स

मलेशिया में वर्ष 2024 के दौरान ड्रोन के जरिए जेलों में ड्रग्स पहुंचाने के 55 मामले सामने आए। जेल परिसरों में प्रतिबंधित सामान पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का फायदा उठाने की कोशिश माना जा रहा है।ऐसी गतिविधियों से जेल प्रशासन के सामने निगरानी बढ़ाने और परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत पैदा होती है। ड्रोन के जरिए सामान पहुंचाने की कोशिशों को रोकने के लिए तकनीकी निगरानी और सुरक्षा उपायों की अहमियत भी बढ़ गई है।

म्यांमार में 2100 ड्रोन हमलों का दावा

रिपोर्ट में म्यांमार की स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। यहां सशस्त्र संगठनों ने करीब 600 स्थानों पर 2100 ड्रोन हमले किए। संघर्ष वाले क्षेत्रों में ड्रोन का इस्तेमाल हमलों और निगरानी के लिए किया जा रहा है। इससे कम लागत वाली तकनीक के सैन्य और सुरक्षा संबंधी जोखिम भी सामने आते हैं।ड्रोन अब केवल तस्वीरें लेने या सामान्य कारोबारी कामों तक सीमित नहीं रह गए हैं। सशस्त्र समूह इन्हें संघर्ष के दौरान इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के लिए खतरे बढ़ सकते हैं।

इंडोनेशिया से सीरिया तक फैले नेटवर्क की जांच

रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया से सीरिया में सक्रिय आतंकियों तक ड्रोन के पुर्जे पहुंचाने वाले एक नेटवर्क का भी पता चला। इससे संकेत मिलता है कि ड्रोन और उनके हिस्सों की आपूर्ति सीमा पार फैले नेटवर्क के जरिए करने की कोशिशें हो सकती हैं।स्टडी में यह भी बताया गया है कि चीन में बने ड्रोन और उनके पुर्जों को सामान्य कारोबारी नेटवर्क, यात्री विमानों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दूसरे देशों तक पहुंचाने की कोशिशें हुई हैं। हालांकि, चीन में बने सभी ड्रोन या पुर्जों को अवैध गतिविधियों से जोड़कर नहीं देखा जा सकता।कुल मिलाकर, दक्षिण-पूर्व एशिया में ड्रोन का दुरुपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ड्रग्स तस्करी से लेकर जेलों की सुरक्षा और सशस्त्र हमलों तक में इनके इस्तेमाल की खबरें बताती हैं कि ड्रोन तकनीक के नियमन, आपूर्ति की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए देशों के बीच सहयोग की जरूरत बढ़ रही है।