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राजस्थान में उत्साह के साथ मनी होली, चंद्रग्रहण के चलते धुलंडी की तिथि को लेकर रहा भ्रम

राजस्थान में उत्साह के साथ मनी होली, चंद्रग्रहण के चलते धुलंडी की तिथि को लेकर रहा भ्रम
 
राजस्थान में उत्साह के साथ मनी होली, चंद्रग्रहण के चलते धुलंडी की तिथि को लेकर रहा भ्रम

प्रदेशभर में मंगलवार को होली का पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। शहरों से लेकर गांवों तक रंग, गुलाल और उत्सव का माहौल नजर आया। हालांकि इस बार चंद्रग्रहण के कारण धुलंडी की तिथि को लेकर लोगों में कुछ भ्रम की स्थिति भी बनी रही।

ज्योतिषीय गणनाओं और पंचांग के अनुसार चंद्रग्रहण के प्रभाव को देखते हुए कई स्थानों पर धुलंडी मनाने को लेकर अलग-अलग मत सामने आए। इसके चलते कुछ लोगों ने मंगलवार को ही रंग खेलकर होली का पर्व मनाया, जबकि कुछ क्षेत्रों में बुधवार को धुलंडी मनाने का निर्णय लिया गया है।

तड़के हुई होलिका दहन की रस्म

इससे पहले प्रदेशभर में तड़के होलिका दहन की परंपरागत रस्में निभाई गईं। विभिन्न मोहल्लों और गांवों में लोगों ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद होलिका दहन किया। मान्यता के अनुसार होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। लोगों ने अग्नि की परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।

होलिका दहन के बाद से ही लोगों में धुलंडी को लेकर उत्साह दिखाई देने लगा था। मंगलवार सुबह से ही बच्चे और युवा रंगों से सराबोर नजर आए। बाजारों में भी सुबह से रौनक रही और लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं।

कुछ स्थानों पर बुधवार को धुलंडी

चंद्रग्रहण के कारण उत्पन्न तिथि भ्रम के चलते प्रदेश के कुछ कस्बों और गांवों में बुधवार को धुलंडी मनाने की तैयारी है। स्थानीय पंडितों और धर्माचार्यों की सलाह के अनुसार वहां रंगोत्सव एक दिन बाद आयोजित किया जाएगा।

इस असमंजस के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। जहां मंगलवार को रंग खेला गया, वहां ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा थिरकते नजर आए। वहीं जिन क्षेत्रों में बुधवार को धुलंडी मनाई जानी है, वहां तैयारियां जोरों पर हैं।

सुरक्षा और शांति व्यवस्था

होली के मद्देनजर प्रशासन ने प्रदेशभर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। प्रमुख शहरों में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई और संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी गई। अधिकारियों ने लोगों से शांति और सौहार्द के साथ पर्व मनाने की अपील की।

कुल मिलाकर, तिथि को लेकर थोड़े भ्रम के बावजूद राजस्थान में होली का पर्व पूरे उत्साह, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया गया। रंगों के इस त्योहार ने एक बार फिर सामाजिक एकता और पारंपरिक संस्कृति की झलक पेश की।