नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता रद्द करने पर सीबीएसई ने हाईकोर्ट में पेश किया जवाब, एंटी-बुलिंग कमेटी को बताया ‘कागजी’
जयपुर में स्थित नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता को लेकर चल रहे विवाद में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल कर दिया है। करीब 170 पन्नों के विस्तृत जवाब में बोर्ड ने स्कूल की शिकायतों और जांच के निष्कर्षों का ब्यौरा देते हुए कहा है कि स्कूल की एंटी-बुलिंग कमेटी केवल कागजी थी और वास्तविक कार्यान्वयन में इसका पालन नहीं किया गया।
CBSE ने हाईकोर्ट में अपने जवाब में यह भी बताया कि स्कूल में कई व्यवस्थागत कमियां पाई गई हैं, जिनके कारण बोर्ड को स्कूल की संबद्धता रद्द करने का कदम उठाना पड़ा। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों को बाल सुरक्षा, नियमों का पालन और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करनी होती है, और इन आवश्यकताओं की अनदेखी गंभीर मामला बन जाता है।
बोर्ड ने कहा कि स्कूल ने कई बार केवल दस्तावेज़ी तौर पर एंटी-बुलिंग कमेटी और अन्य सुरक्षा उपायों का हवाला दिया, लेकिन उनकी वास्तविकता और प्रभावशीलता की जांच में कमी पाई गई। CBSE के अनुसार, छात्राओं की सुरक्षा और उनके हित को सर्वोपरि रखते हुए ही यह कदम उठाया गया।
नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता रद्द होने का मामला पिछले कुछ महीनों से सुर्खियों में है। स्कूल के खिलाफ शिकायतें और जांच के बाद CBSE ने इसकी संपूर्ण समीक्षा की थी। बोर्ड के इस कदम को लेकर शिक्षा जगत और मीडिया में व्यापक चर्चा रही है, क्योंकि यह मामला न केवल स्कूल की प्रतिष्ठा से जुड़ा है, बल्कि पूरे शैक्षणिक प्रशासन के लिए भी नीति और जवाबदेही का उदाहरण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एंटी-बुलिंग और छात्र सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन प्रत्येक स्कूल के लिए अनिवार्य है। दस्तावेज़ों में सिर्फ नियमों का पालन दिखाना पर्याप्त नहीं है; वास्तविक क्रियान्वयन, शिकायत निवारण और सुरक्षा उपायों की नियमित जांच भी जरूरी है। CBSE का जवाब इस दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
हाईकोर्ट में दाखिल 170 पृष्ठों के जवाब में बोर्ड ने यह भी बताया कि स्कूल ने एंटी-बुलिंग कमेटी और अन्य सुरक्षा उपायों के अभाव में छात्रों की शिकायतों को उचित रूप से निपटाया नहीं। बोर्ड ने कहा कि संबद्धता रद्द करना एक अंतिम और आवश्यक कदम था, जिससे छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
नीरजा मोदी स्कूल की ओर से अब हाईकोर्ट में जवाब देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की संभावना है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मामला अदालत में लंबित रहने के दौरान स्कूल के संचालन और छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ सकता है। वहीं, शिक्षा नियामक और पालकों की नजर इस मामले पर बनी हुई है।
इस मामले से यह संदेश साफ है कि स्कूल केवल दस्तावेज़ों के आधार पर नियमों को पूरा नहीं कर सकते। छात्रों की सुरक्षा और उनके हितों की प्राथमिकता हर शैक्षणिक संस्थान के लिए अनिवार्य है। CBSE का कदम शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
