हाईकोर्ट के राजस्थान एसआई भर्ती रद्द करने के फैसले पर कैंडिडेट्स ने जमकर किया विरोध, फुटेज में देंखे RPSC पहुंच किया हंगामा
राजस्थान उच्च न्यायालय ने हाल ही में एसआई (सब इंस्पेक्टर) भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया था, जिससे हजारों कैंडिडेट्स को झटका लगा। कोर्ट के फैसले के खिलाफ अब एसआई भर्ती के ट्रेनिंग कर चुके कैंडिडेट्स ने आरपीएससी (राजस्थान लोक सेवा आयोग) का रुख किया है। इन कैंडिडेट्स ने डबल बैंच में अपील करने की मांग की है।
कैंडिडेट्स का कहना:
इन कैंडिडेट्स का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह से ग़लत है, और उन्हें इस फैसले से भारी नुकसान हुआ है। वे इस फैसले के खिलाफ डबल बैंच में अपील करना चाहते हैं, ताकि उच्च न्यायालय के एक और न्यायाधीश द्वारा इस मामले पर पुनर्विचार किया जा सके।
कैंडिडेट्स की मुख्य मांगें:
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गैर-जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन जिन कैंडिडेट्स का कोई दोष नहीं था, उनके साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
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जिन्होंने ट्रेनिंग पूरी की और जो प्रक्रिया में सही थे, उनके हक को सम्मानित किया जाए।
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आरपीएससी और सरकार को चाहिए कि वे इन कैंडिडेट्स का साथ दें और इस फैसले पर पुनर्विचार कराएं।
कैंडिडेट्स का कहना है कि उनका जीवन इस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था और उन्होंने कड़ी मेहनत की थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के फैसले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
क्या है मामला?
राजस्थान पुलिस एसआई भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां सामने आईं थीं, जिसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया। कई कैंडिडेट्स का कहना है कि वे पूरी प्रक्रिया में सही थे और उन्होंने शुद्ध रूप से ट्रेनिंग ली। अब, उन सभी कैंडिडेट्स को फिर से भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए छोड़ दिया गया है, जो उनके लिए एक बड़ा अन्याय है।
अगला कदम:
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कैंडिडेट्स का कहना है कि वे डबल बैंच में जाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और यदि उन्हें सहयोग और समर्थन मिलता है तो वे इस मामले को उच्च स्तर पर लेकर जाएंगे।
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इसके साथ ही, इन कैंडिडेट्स ने राजस्थान सरकार और आरपीएससी से भी गुजारिश की है कि इस फैसले का पुनरावलोकन किया जाए और उन लोगों को मौका दिया जाए, जिनका इसमें कोई दोष नहीं था।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव:
यह मामला केवल कैंडिडेट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भर्ती प्रक्रियाओं और साक्षात्कार के दौरान मानवाधिकारों और न्यायिक पारदर्शिता के मुद्दे को भी उजागर करता है। अगर उच्च न्यायालय का निर्णय बरकरार रहता है, तो इससे आगामी भर्ती प्रक्रियाओं पर भी प्रभाव पड़ेगा।
