कार का रंग भी बन सकता है सड़क हादसों का कारण? रिसर्च में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
सड़क हादसों के पीछे अब तक तेज रफ्तार, नशे में ड्राइविंग और लापरवाही को मुख्य कारण माना जाता रहा है, लेकिन हाल के ऑटो सेफ्टी स्टडीज में एक नया और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है—गाड़ी का रंग।
रिसर्च और ट्रैफिक सुरक्षा अध्ययनों के अनुसार, वाहन का रंग उसकी विजिबिलिटी यानी दिखाई देने की क्षमता को प्रभावित करता है, और यही कारण दुर्घटनाओं के जोखिम को बढ़ा या घटा सकता है।
काले और गहरे रंग की गाड़ियां ज्यादा जोखिम में
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पाया गया है कि काले रंग की गाड़ियां सबसे अधिक दुर्घटनाओं में शामिल होती हैं। कई रिसर्च के अनुसार, सफेद रंग की तुलना में काली गाड़ियों में लगभग 10% से 47% तक अधिक दुर्घटना जोखिम देखा गया है, खासकर कम रोशनी या रात के समय में।
विशेषज्ञों का कहना है कि काले रंग की गाड़ियां सड़क और आसपास के वातावरण में आसानी से घुल-मिल जाती हैं, जिससे अन्य वाहन चालकों को उन्हें देखने में कठिनाई होती है।
सफेद और हल्के रंग सबसे सुरक्षित माने गए
इसके उलट सफेद, पीले और हल्के रंग की गाड़ियों को सबसे अधिक सुरक्षित माना गया है। अध्ययनों के अनुसार सफेद कारें अन्य गाड़ियों की तुलना में लगभग 10% तक कम दुर्घटनाओं में शामिल होती हैं, क्योंकि ये अधिक विजिबल होती हैं।
ग्रे, सिल्वर और नीले रंग भी जोखिम बढ़ा सकते हैं
रिपोर्ट्स के मुताबिक ग्रे, सिल्वर, नीले और लाल रंग की गाड़ियों में भी दुर्घटना का जोखिम थोड़ा अधिक पाया गया है, जिसका मुख्य कारण उनकी कम कंट्रास्ट विजिबिलिटी बताया गया है।
क्यों होता है ऐसा?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला “विजिबिलिटी और कंट्रास्ट” पर आधारित है। यानी जो गाड़ी सड़क और बैकग्राउंड के मुकाबले कम दिखाई देती है, उसके हादसे का शिकार होने की संभावना ज्यादा होती है।
